2024: सर्वोच्च न्यायालय के सुप्रीम फैसले, पिछले तीन महीनों में जिन्होंने खींचा हर किसी का ध्यान

देश के लिए अदालत का अहम महत्व होता है। हर फरियादी की आवाज अदालत सुनता है। अदालत एक ऐसी जगह है, जहां हर किसी को न्याय मिलता है। आज हम बात कर रहे हैं देश के सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट की। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने साल 2024 के पिछले तीन महीने में कई अहम फैसले दिए हैं। आज इसी के बारें में हम आपको जानकारी दे रहे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने साल 2024 के पिछले तीन महीने में कई अहम फैसले दिए हैं।

आइए देखें यह फैसले

इलेक्टोरल बाॅन्ड

जिसमें इलेक्टोरल बॉन्ड का सच छह साल बाद सबके सामने आया‌। ‌इसके लिए राजनीतिक पार्टियों को चुनावी बॉन्ड के जरिए मिले डोनेशन को सार्वजनिक करने के लिए देश की शीर्ष अदालत को एक्शन लेना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को कई बार फटकार लगाई। तब जाकर एसबीआई की ओर से दिए गए डेटा को चुनाव आयोग ने 14 मार्च 2024 को अपनी वेबसाइट पर शेयर कर दिया।

फैक्ट चेक यूनिट की अधिसूचना पर लगाई रोक

जिसमें एक यह मामला भी था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बड़ा झटका देते हुए फैक्ट चेक यूनिट की अधिसूचना पर रोक लगा दी। साथ ही केंद्र सरकार ने ऑनलाइन मीडिया पर फर्जी कंटेंट की पहचान के लिए फैक्ट चेकिंग यूनिट तैयार की थी। आईटी नियमों में किए गए संशोधन के मुताबिक अगर फैक्टर चेक यूनिट, केंद्र सरकार के जुड़ी किसी खबर या जानकारी को फर्जी पाता है तो उसे तुरंत सोशल मीडिया से हटाना होगा। अगर सोशल मीडिया से ऐसे कंटेंट को हटाया नहीं जाता है तो उस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

चंडीगढ़ मेयर चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट का एतिहासिक फैसला

चंडीगढ़ मेयर चुनाव में हुई गड़बड़ी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय बेंच ने आदेश दिया कि मेयर चुनाव में अमान्य किए गए 8 बैलेट पेपर मान्य माने जाएंगे। जिसके बाद आम आदमी पार्टी के कुलदीप कुमार को मेयर घोषित कर दिया गया।

बिलकिस बानो केस में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

बिलकिस बानो गैंगरेप मामले में दोषियों की जल्द रिहाई की अनुमति देने वाले गुजरात सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने 11 दोषियों की रिहाई का आदेश रद्द कर दिया। इन दोषियों को 15 अगस्त 2022 को रिहा किया गया था। अब इन्हें दोबारा जेल जाना पड़ेगा।

नवनीत कौर राणा को जाति प्रमाण पत्र मामले में दी बड़ी राहत

आम चुनाव में महाराष्ट्र के अमरावती से बीजेपी उम्मीदवार नवनीत कौर राणा को जाति प्रमाण पत्र मामले पर सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। SC ने बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया है और नवनीत के जाति प्रमाण पत्र को सही ठहराया। दरअसल बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 जून 2021 को कहा था कि नवनीत ने मोची जाति का प्रमाण पत्र फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके धोखाधड़ी से हासिल किया था। हाईकोर्ट ने उन पर 2 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया था।

सदन में नोट लेकर वोट में सुनाया बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने वोट के बदले नोट मामले में मार्च में एक बड़ा फैसला सुनाया। अब अगर सांसद पैसे लेकर सदन में भाषण या वोट देते हैं तो उनके खिलाफ केस चलाया जा सकेगा। यानी अब उन्हें इस मामले में कानूनी छूट नहीं मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पिछले फैसले को पलट दिया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 1998 के नरसिम्हा राव के फैसले को पलट दिया है. 1998 में 5 जजों की संविधान पीठ ने 3:2 के बहुमत से तय किया था कि इस मुद्दे को लेकर जनप्रतिनिधियों पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पलटने के चलते अब सांसद या विधायक सदन में मतदान के लिए रिश्वत लेकर मुकदमे की कार्रवाई से नहीं बच सकते हैं।

ज्ञानवापी मामला

सुप्रीम कोर्ट ने एक अप्रैल को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के दक्षिणी तहखाने में होने वाली पूजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने ज्ञानवापी परिसर में हिंदू और मुस्लिम दोनों द्वारा पूजा पर यथास्थिति बनाए रखने का भी आदेश दिया। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने ज्ञानवापी मस्जिद समिति की याचिका पर काशी विश्वनाथ मंदिर के ट्रस्टियों और अन्य से 30 अप्रैल तक जवाब मांगा। इसने जुलाई में अंतिम निपटान के लिए ज्ञानवापी परिसर के दक्षिणी तहखाने में पूजा की अनुमति के खिलाफ मस्जिद समिति की याचिका भी तय की।

मदरसा बोर्ड

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 22 मार्च को दिए आदेश पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में ‘यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004’ को असंवैधानिक बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के ये कहना कि मदरसा बोर्ड संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांत का उल्लंघन करता है, ये ठीक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही मदरसा बोर्ड के 17 लाख छात्रों और 10 हजार अध्यापकों को अन्य स्कूलों में समायोजित करने की प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भी जारी किया है।