23 मई: आज है बुद्ध पूर्णिमा, गौतम बुद्ध और भगवान विष्णु की करें विधिवत पूजा-अर्चना, जानें शुभ मुहूर्त‌ व पूजन विधि

आज 23 मई है। आज बुद्ध पूर्णिमा का व्रत है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा बेहद खास मानी जाती है और बुद्ध पूर्णिमा सबसे ज्यादा शुभ मानी जाती है। आज बुद्ध पूर्णिमा है। इसी दिन वैशाख पूर्णिमा का व्रत भी रखा जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। बुद्ध पूर्णिमा पर गौतम बुद्ध और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन गौतम बुद्ध और भगवान विष्णु का विधि-विधान के साथ पूजा करता है। उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।

भगवान बुद्ध की 2586वीं जयंती

बैद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध का जन्म वैशाख पूर्णिमा तिथि को लुंबिनी में हुआ था। इस वजह से हर साल वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा मनाते हैं। इस साल बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध की 2586वीं जयंती है। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बौद्ध धर्म के लोग प्रार्थना करते हैं और उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करते हैं। इस तिथि का भगवान बुद्ध के जीवन से गहरा जुड़ाव है। इस तिथि पर उनका जन्म हुआ था और वैशाख पूर्णिमा पर ही कुशीनगर उनका देहांत हुआ था। बोधगया में वैशाख पूर्णिमा के दिन उनको ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यह तिथि भगवान बुद्ध के जीवन, मरण और ज्ञान प्राप्ति से जुड़ी है।

यह रहेगा शुभ मुहूर्त

बुध पूर्णिमा तिथि का आरंभ पंचांग दिवाकर के अनुसार 22 मई को बुधवार शाम के समय 6 बजकर 48 मिनट पर हो गया है और 23 मई गुरुवार को रात में 7 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। ऐसे में वैशाख पूर्णिमा का व्रत आज 23 मई को किया जाएगा। इस दिन स्नान-दान करने का शुभ मुहूर्त सुबह 4 बजकर 4 मिनट से सुबह 5 बजकर 26 मिनट तक है। वहीं पूजा का समय सुबह 10 बजकर 35 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक है। चंद्रोदय का समय रात 7 बजकर 12 मिनट है।

पूजन विधि

आज सुबह जल्दी उठें और सुबह स्नान आदि करें। इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। इसके साथ ही भगवान बुद्ध की प्रतिमा भी स्थापित करें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। इसी के साथ व्रत का संकल्प लें और फिर पानी का घड़ा किसी ब्राह्मण को दान दें। इसके बाद शाम में समय सत्यनारायण कथा का पाठ करें इसके लिए कसार का प्रसाद और चरणामृत जरुर बनाए। भगवान विष्णु को भोग लगाएं और फिर ब्रह्माण को भोजन कराने के बाद ही अपना व्रत खोले।