17 सितंबर: गणेश विसर्जन मुहूर्त: आज अनंत चतुर्दशी के दिन इस मुहूर्त में करें गणेश विसर्जन, जानें शुभ मुहूर्त का समय

आज 17 सितंबर है। आज अनंत चतुर्थी है। अनंत चतुर्दशी को अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है। इस बार अनंत चतुर्दशी 17 सितंबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। इसमें व्रत का संकल्प लेकर अनन्तसूत्र बांधा जाता है। माना जाता है कि इसको धारण करने से संकटों का नाश होता है। इस दिन भगवान विष्णु के भक्त पुरे दिन का उपवास रखते हैं और पूजा के दौरान पवित्र धागा बांधते हैं। भगवान गणेश का विसर्जन भी इसी दिन किया जाता है। आज गणेश उत्सव का आखिरी दिन यानी अनंत चतुर्दशी है। वहीं पूजा-पाठ के बाद गणेश जी की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।

जानें गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी का विसर्जन किया जाता है। इस दिन गणेश जी के विसर्जन के लिए सबसे शुभ मुहूर्त दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम 4 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। ये बहुत ही शुभ मुहूर्त है। आपको कुल 1 घंटा 30 मिनट का समय मिलेगा। गणेश विसर्जन आप सूर्योदय के बाद से यानि सुबह 06:07 बजे से कर सकते हैं। उस दिन अनंत चतुर्दशी पूजा का मुहूर्त सुबह 6:07 बजे से 11:44 बजे तक है।

अनंत चतुर्दशी शुभ मुहूर्त

उदया तिथि के अनुसार, अनंत चतुर्दशी 17 सितंबर यानी आज मनाई जा रही है। अनंत चतुर्दशी की तिथि का आरंभ 16 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 10 मिनट पर शुरू हो जाएगा और इस तिथि का समापन 17 सितंबर को सुबह 11 बजकर 44 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, अनंत चतुर्दशी इस बार 17 सितंबर, मंगलवार को ही मनाई जाएगी।

अनंत चतुर्दशी की कथा

अनंत चतुर्दशी सम्बन्धित कथा महाभारत काल से जुड़ी है। इस कथा के अनुसार कौरवों ने छल से जुए में पांडवों को हरा दिया था। इसके बाद पांडवों को अपना राजपाट त्याग कर वनवास जाना पड़ा। इस दौरान पांडवों ने बहुत कष्ट उठाए। ऐसे में एक दिन श्री कृष्ण पांडवों से मिलने वन पहुंचे। तब युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से कहा कि, हे प्रभु हमें इस पीड़ा से निकलने का और दोबारा राजपाट प्राप्त करने का मार्ग दिखाएं। श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर की बात सुनकर पांचों पांडवों और द्रौपदी सभी को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी का व्रत रखने की सलाह दी। और साथ ही भगवान अनंत की पूजा करने के लिए कहा। युधिष्ठिर ने अनंत भगवान के बारे में पूछा तो श्री कृष्ण ने बताया कि भगवान अनंत श्री हरि विष्णु के ही रूप हैं। चातुर्मास में भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर अनंत शयन में रहते हैं। इतना ही नहीं अनंत भगवान ने ही वामन अवतार में दो पग में ही तीनों लोकों को नाप लिया था। इसीलिए इनके पूजन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। श्री कृष्ण की बात सुनकर युधिष्ठिर ने परिवार समेत इस व्रत को धारण किया जिसके शुभ फलस्वरूप उन्हें पुन: हस्तिनापुर का राजपाट मिला।