15 अगस्त: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज: एक नहीं इस बार दो दिन मनेगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का उत्सव, यहां देखें शुभ मुहूर्त

आज 15 अगस्त 2025 है। आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है। इस साल जन्माष्टमी का त्योहार दो दिन मनाया जा रहा है। दोनों ही दिन कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत पूजा पाठ आदि विधि विधान से किए जाएंगे। कृष्ण जन्माष्टमी 15 और 16 अगस्त को मनाई जाएगी। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन की आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। भारत के साथ दुनियाभर में इस त्योहार को एक उत्सव की तरह मनाया जाता है।

दुनियाभर में उत्सव के साथ मनाया जाता है जन्माष्टमी त्योहार

भारत में कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार बहुत ही धूमधाम और श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का खास महत्व है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि भाई कंस के अत्याचार को कारागार में रह सह रही बहन देवकी ने भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अपनी आठवीं संतान के रूप में श्रीकृष्ण को जन्म दिया था। भगवान विष्णु ने पृथ्वी को कंस के अत्याचार और आतंक से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। इसी कथा के अनुसार हर साल भाद्रपद की अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

आचार्य भानु प्रकाश जोशी ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रत 15 अगस्त सन 2025 शुक्रवार को सप्तमी अष्टमी के संयोग में ही किया जाएगा। 15 अगस्त को  रात्रि 11 बजकर 23 मिनट तक (सूक्ष्म बेला कुछ सेकेंड अथवा मिनट का संस्कार छोड़ भी दें) सप्तमी उपरांत अष्टमी प्रवेश हो जाएगी। शनिवार 16 अगस्त को अष्टमी रात्रि नौ बजकर पैंतीस मिनट तक ही है उपरांत नवमी प्रवेश होगी इसलिए अर्धरात्रि काल में 16 अगस्त को अष्टमी का पूर्ण अभाव होगा । इसलिए शास्त्र निर्णय अनुसार श्री कृष्ण का जन्म अर्धरात्रि की अष्टमी में हुआ अतः जन्माष्टमी व्रत का कर्मकाल भगवान श्रीकृष्ण का व्रत उनके बालरूप का पूजन झूला झुलाना चंद्रमा को अर्घ रात्रि जागरण आदि अर्ध रात्रि ही है । अतएव जन्माष्टमी व्रत रखने के लिए अर्द्धरात्रि में अष्टमी तिथि का होना अनिवार्य है। नवमी तिथि का अर्धरात्रि में कोई औचित्य नहीं है ।

जानें शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार भादो के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 15 अगस्त 2025 की रात करीब 11:48 बजे से लगेगी और यह 16 अगस्त की रात को 9:34 बजे समाप्त होगी। ऐसे में 15 अगस्त को मध्य रात्रि आने से और 16 अगस्त को मध्य रात्रि से पहले अष्टमी तिथि समाप्त होगी।
🔸🔸वैदिक पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 15 अगस्त की रात 11:49 से शुरू होकर 16 अगस्त की रात 9:34 तक रहेगी, इसलिए 15 अगस्त को गृहस्थ जीवन में रहने वाले भक्त इसका व्रत करके संपूर्ण फल प्राप्त कर सकते हैं। वहीं 16 अगस्त को वैष्णव संप्रदाय के साधु संतों, भक्तों द्वारा जन्माष्टमी का व्रत विधि विधान से किया जाएगा।

जानें कैसे मनाते हैं कृष्ण जन्माष्टमी?

जन्माष्टमी पर भक्त श्रद्धानुसार उपवास रखते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा अर्चना की जाती हैं। बाल गोपाल की जन्म मध्य रात्रि में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी की तिथि की मध्यरात्रि को घर में मौजूद लड्डू गोपाल की प्रतिमा का जन्म कराया जाता है। फिर उन्हें स्नान कराकर सुंदर वस्त्र धारण कराए जाते हैं। फूल अर्पित कर धूप-दीप से वंदन किया जाता है। कान्हा को भोग अर्पित किया जाता है। उन्हें दूध-दही, मक्खन विशेष पसंद हैं। इसलिए भगवान को भोग लगाकर सबको प्रसाद वितरित किया जाता है।