दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली, संकट में है वजूद, इन पाइंटस में समझिए अरावली की जरूरत

आज हम बात कर रहे हैं अरावली पर्वत की। जिसको लेकर देश भर में चर्चा हो रही है। इसकी वजह है कि 250 करोड़ साल पुरानी इन पर्वतमालाओं की हाइट छोटी करने की बात कही जा रही है। जो एक बड़ा चिंता का विषय है।

पहाड़ी क्षेत्र में भी संकट

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर 2025 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक कमेटी की अरावली पहाड़ियों की परिभाषा संबंधी सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था। नई परिभाषा के मुताबिक इसके बाद केवल उसी भू-आकृति को अरावली पहाड़ियों में शामिल किया जाएगा, जो अपने धरातल से कम से कम 100 मीटर ऊंची हो। साथ ही 500 मीटर की दूरी पर स्थित दो पहाड़ी को भी एक ही पर्वत श्रंखला का भाग माना जाएगा। एक्टिविस्ट्स के मुताबिक, नई परिभाषा अरावली में माइनिंग, कंस्ट्रक्शन और कमर्शियल एक्टिविटीज को बढ़ावा मिल सकता है। अरावली की बर्बादी का मतलब है दिल्ली सहित पूरे एनसीआर में जीवन पर संकट।
इसके बाद अरावली पहाड़ियों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक विरोध हो रहा है।

अरावली की जरूरत

• इसकी पहाड़ियां रेगिस्तान को फैलने से रोकती हैं।
• मानसून और बारिश के पैटर्न को भी निर्धारित और तय करने में रोल निभाती हैं।
• ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करती हैं।
• प्रदूषण और धूल को उत्तर भारत की तरफ बढ़ने से रोकती हैं।
• जैव विविधता की भरमार है यानी हजारों-लाखों तरह के पेड़-पौधे और जीव-जंतु पाए जाते हैं।

प्राचीनतम पर्वत श्रेणी में एक अरावली पर्वत

अरावली का नाम संस्कृत शब्द ‘अरावलि’ से आया है, जिसका अर्थ है- पत्थरों की पंक्ति। अरावली भारत के पश्चिमी भाग राजस्थान में स्थित एक पर्वतमाला है। जिसे राजस्थान में आडावाला पर्वत के नाम से भी जाना जाता है,भारत की भौगोलिक संरचना में अरावली प्राचीनतम पर्वत श्रेणी है, जो गोडवाना लेंड का अस्तित्व है। यह संसार की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखला है जो राजस्थान को उत्तर से दक्षिण दो भागों में बाँटती है। इसकी उत्पत्ति प्रिकेंबियन युग (45000 लाख वर्ष ) में हुई। आरावली का सर्वोच्च पर्वत शिखर सिरोही जिले में गुरुशिखर (1722 /1727 मी.) है, जो माउंट आबू(सिरोही) में है, जो राजस्थान की सबसे ऊँची चोटी हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, अरावली का निर्माण प्रोटेरोजोइक युग में हुआ था, जो लगभग 250-350 करोड़ साल पहले शुरू हुआ था। यह श्रृंखला न केवल भारत की जलवायु और पर्यावरण को प्रभावित करती है, बल्कि यह थार रेगिस्तान के फैलाव को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।