रामनगर: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायिक कार्यवाही के दौरान एक अधिवक्ता को 24 घंटे की हिरासत में भेजे जाने की घटना का असर अब उत्तराखंड में भी दिखने लगा है।
कहीं यह बात
जिस पर रामनगर टैक्स बार एसोसिएशन ने इस घटना पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए इसे अधिवक्ता समुदाय की गरिमा पर हमला करार दिया है। इस विषय पर आयोजित एक विशेष बैठक में एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। वक्ताओं ने कहा कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था की एक अनिवार्य कड़ी हैं। इस तरह की घटनाएं न केवल अधिवक्ताओं के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाती हैं, बल्कि न्यायपालिका की निष्पक्ष छवि को भी धूमिल करती हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष पूरन चंद्र पांडे और उपसचिव मनु अग्रवाल ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि वे इस मुद्दे पर उत्तराखंड बार काउंसिल, नैनीताल हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और देशभर के अन्य अधिवक्ता संगठनों के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।
जांच की मांग
एसोसिएशन ने संबंधित न्यायिक अधिकारी के विरुद्ध उचित कार्रवाई और मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है। अधिवक्ताओं की स्वतंत्र कार्यप्रणाली और स्वायत्तता सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर आवाज उठाने का संकल्प लिया गया। सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा गया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इन्हें रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
रामनगर: अधिवक्ता को हिरासत में भेजने पर भड़का आक्रोश: रामनगर टैक्स बार एसोसिएशन ने न्यायिक कार्रवाई पर जताया विरोध, की यह मांग