आज 31 मई 2026 है। आज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का ध्वज, जो बाद में राष्ट्रीय ध्वज के रूप में विकसित हुआ, 31 मई, 1921 को अपनाया गया था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अनौपचारिक ध्वज 31 मई 1921 को महात्मा गांधी द्वारा स्वीकृत किया गया था। हालांकि, इसे सीधे तौर पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह कांग्रेस का अपना राजनीतिक और संघर्ष का प्रतीक था। आज के आधुनिक तिरंगे के विकास की यह एक महत्वपूर्ण और आरंभिक अवस्था थी।
इस ध्वज से जुड़ी जानकारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1921 में गांधीजी ने आज ही के दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ध्वज को स्वीकृत और संशोधित किया। यह मूल रूप से आंध्र प्रदेश के एक व्यक्ति द्वारा डिजाइन किया गया था, जिसमें हिंदू और मुस्लिम समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले लाल और हरे रंग की पट्टियों को स्थान दिया गया था। गांधी जी ने सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और राष्ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए। 1921 में गाँधीजी ने 31 मई के दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ध्वज को स्वीकृत और संशोधित किया।
डिज़ाइन और निर्माता
यह ध्वज युवा स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया द्वारा डिज़ाइन किया गया था। 1921 में कांग्रेस के विजयवाड़ा (तत्कालीन बेजवाड़ा) सत्र के दौरान उन्होंने महात्मा गांधी को इसका ड्राफ्ट पेश किया था। इस आरंभिक ध्वज में मुख्य रूप से तीन क्षैतिज (Horizontal) पट्टियाँ और केंद्र में एक चरखा था। हिंदू समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए हरा: मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए सफेद: गांधीजी के सुझाव पर जोड़ा गया था, जो अन्य अल्पसंख्यकों और शांति का प्रतीक था।
बाद के महत्वपूर्ण बदलाव
1931 का संशोधन: रंगों को लेकर विवादों के कारण 1931 में लाल रंग को बदलकर केसरिया (Saffron) कर दिया गया। यह साहस और त्याग का प्रतीक बन गया।