नैनीताल: मानव-वन्यजीव संघर्ष की सुलझी गुत्थी, डीएनए रिपोर्ट में हुआ खुलासा—दो अलग-अलग बाघों ने किया महिलाओं का शिकार

नैनीताल: नैनीताल वन प्रभाग में बीते शीतकाल के दौरान हुई महिलाओं की मौत के मामलों में भारतीय वन्य जीव संस्थान (WII) की डीएनए रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है।

रिपोर्ट में खुलासा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रिपोर्ट के अनुसार, भवाली और मनोरा रेंज में तीन महिलाओं को निवाला बनाने में एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग वन्य जीव शामिल थे। इसमें से दो महिलाओं को बाघ ने, जबकि एक को बाघिन ने अपना शिकार बनाया था। नैनीताल के डीएफओ आकाश गंगवार ने बताया कि विभाग ने मृतक महिलाओं से मिले बाल और लार के सैंपल डीएनए जांच के लिए भेजे थे। रिपोर्ट के अनुसार भीमताल के जून स्टेट में 3 फरवरी को हुई गंगा देवी की मौत और 22 अप्रैल को ज्योली में हेमा देवी की मौत के मामले में सैंपल बाघ से मेल खाए हैं। 3 अप्रैल को सूर्यागांव में हंसा देवी को अपना निवाला बनाने वाली एक बाघिन थी, जिसके सैंपल मिलान की पुष्टि हुई है। डीएनए मिलान के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जंतवालगांव से रेस्क्यू की गई बाघिन को फिलहाल देहरादून जू भेज दिया गया है, जहाँ उसे क्वारंटाइन में रखा जाएगा। 28 अप्रैल को ज्योली से रेस्क्यू किया गया 7-8 साल का नर बाघ फिलहाल रानीबाग रेस्क्यू सेंटर में ही है। डीएफओ के अनुसार, वह वहां पूरी तरह स्वस्थ है और उसे फिलहाल वहीं कैद में रखा जाएगा।

रहस्य बने हैं तीन अन्य मामले


वन विभाग के लिए हालांकि तीन अन्य मामले अभी भी रहस्य बने हुए हैं। जिसमें 26 दिसंबर को तल्ली दीनी (हेमा देवी), 30 दिसंबर को खन्स्यू चमोली (रेखा देवी) और 11 जनवरी को धारी के कुटियाखाल (गंगा देवी) में हुई मौतों के लिए जिम्मेदार वन्य जीव कौन था, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। डीएनए मिलान के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जंतवालगांव से रेस्क्यू की गई बाघिन को फिलहाल देहरादून जू भेज दिया गया है, जहाँ उसे क्वारंटाइन में रखा जाएगा।