उत्तराखंड: मानसून में नहीं टूटेगा पहाड़ों का संपर्क, पीडब्ल्यूडी ने तैयार किया 2026-31 मास्टर प्लान, प्रदेश के पुल बनेंगे आपदा-रोधी

उत्तराखंड: उत्तराखंड में मानसून के दौरान पुल टूटने से कटने वाले संपर्क मार्गों की समस्या से निपटने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने पहली बार एक बड़ी रणनीति तैयार की है।

तैयार की रणनीति

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए विभाग ने वर्ष 2026-31 का मास्टर प्लान जारी किया है, जिसके तहत प्रदेश के हजारों पुलों को आपदा-रोधी बनाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य भारी आपदा और नदी के उफान के दौरान भी सीमांत क्षेत्रों, गांवों और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इलाकों की मुख्यधारा से कनेक्टिविटी बनाए रखना है।

पहले चरण की योजना

पहले चरण में 104 राज्य राजमार्गों पर स्थित 349 पुलों को ‘क्लास-ए’ लोडिंग मानकों के अनुरूप अपग्रेड किया जाएगा। इसे वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है। एशियाई विकास बैंक की सहायता से 235 पुलों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। इनमें क्लास-70R क्षमता, भूकंपरोधी डिजाइन और बाढ़ सुरक्षा जैसे आधुनिक मानक शामिल होंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्ष 2022 के सर्वे में चिन्हित 91 असुरक्षित पुलों में से 76 पुलों की मरम्मत और रेट्रोफिटिंग पूरी की जा चुकी है। शेष 15 पुलों का पुनर्निर्माण मार्च 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा।
​इसके अलावा, सीमांत क्षेत्रों के 30 स्थानों पर जहाँ लोग आज भी जोखिम उठाकर मैनुअल ट्रॉली से नदियां पार करते हैं, वहाँ वर्ष 2028 तक स्थायी पुल बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। वर्तमान में 8 पुल निर्माणाधीन हैं और 15 की डीपीआर (DPR) तैयार हो रही है।