अल्मोड़ा: सोबन सिंह जीना (एसएसजे) परिसर में छात्रसंघ चुनाव के उपाध्यक्ष पद को लेकर बीते कई दिनों से चला आ रहा हाईवोल्टेज ड्रामा आखिरकार खत्म हो गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में शांति और छात्र हित को सर्वोपरि रखते हुए एक अभूतपूर्व रास्ता निकाला है।
सौंपी जिम्मेदारी
जिसमें इतिहास में पहली बार उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दो नेताओं को संयुक्त रूप से सौंपी गई है। कुमाऊं भर में एसएसजे प्रशासन का यह अनूठा ‘फॉर्मूला’ इस वक्त जबरदस्त चर्चा में है।उपाध्यक्ष पद पर तीन प्रत्याशी—भाष्कर जोशी, सुमित जोशी (पुत्र हेमंत जोशी) और सुमित जोशी (पुत्र चंद्रशेखर जोशी) चुनावी मैदान में थे। 29 सितंबर को हुई मतगणना में भाष्कर जोशी को 1 वोट से विजेता घोषित किया गया। केवल एक वोट से पिछड़ने पर सुमित जोशी ने री-काउंटिंग की मांग की। जब दोबारा गिनती हुई तो दोनों प्रत्याशियों के वोट बिल्कुल बराबर (टाई) निकले। नियम के मुताबिक पर्ची निकालकर भाग्य का फैसला किया गया, जिसमें सुमित जोशी (पुत्र हेमंत जोशी) की किस्मत चमकी और उन्हें विजयी घोषित कर दिया गया।
कॉलेज छत पर ड्रामा और विरोध प्रदर्शन
पर्ची सिस्टम से आए नतीजे को भाष्कर जोशी और उनके समर्थकों ने स्वीकार करने से इंकार कर दिया। इसके बाद परिसर में भारी हंगामा हुआ—छात्र कॉलेज की छत पर चढ़ गए और पुतला दहन कर विरोध जताया। माहौल बिगड़ता देख विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत एक जांच टीम गठित की। छात्रों के बीच बढ़ते टकराव और परिसर का माहौल खराब होने से बचाने के लिए प्रशासन ने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाया। दोनों प्रत्याशियों ने आपसी सहमति जताई और अपना-अपना शपथ पत्र जमा किया। इसके बाद प्रशासन ने दोनों ही प्रत्याशियों को संयुक्त रूप से उपाध्यक्ष पद पर काबिज करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
निदेशक का बयान
“छात्रसंघ उपाध्यक्ष पद पर दोनों प्रत्याशियों ने अपना-अपना शपथ पत्र दिया है। आपसी सहमति बनने के बाद ही दोनों को संयुक्त रूप से उपाध्यक्ष पद पर काबिज किया गया है।”
— प्रो. जगत सिंह बिष्ट (निदेशक, एसएसजे परिसर अल्मोड़ा)