उत्तराखंड: उत्तराखंड में जनगणना को लेकर चल रही सभी अटकलों पर विराम लग गया है। जनगणना अभियान की निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने इस संबंध में स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में जनगणना को लेकर कोई देरी नहीं होगी।
दी यह जानकारी
बताया कि यह पूरी प्रक्रिया अपने तय शेड्यूल के अनुसार ही संचालित की जाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने बताया कि राज्यभर में ग्राउंड लेवल पर जनगणना का मुख्य कार्य 1 दिसंबर 2026 से शुरू होकर 4 जनवरी 2027 तक चलेगा। इस फील्ड सर्वे से ठीक पहले आम जनता की सुविधा के लिए खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने यानी ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ की सुविधा भी दी जाएगी। यह विशेष सुविधा 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक, यानी पूरे दो हफ्तों के लिए उपलब्ध होगी। बताया कि राज्य में काम पूरी गति से और पूर्व निर्धारित योजना के तहत ही आगे बढ़ेगा।
दो चरणों में हो रही है जनगणना
2027 की यह देशव्यापी जनगणना दो चरणों में संपन्न हो रही है।
पहला चरण: अप्रैल 2026 में शुरू हो चुका है, जिसके तहत मकानों की सूची बनाने और हाउसिंग सेंसस का काम किया गया है। इसमें घरों की स्थिति, मिलने वाली सुविधाओं और संपत्तियों का डेटा जुटाया गया।
दूसरा चरण: अब इस चरण में हर व्यक्ति की जनसांख्यिकीय, सामाजिक और आर्थिक जानकारी जुटाई जाएगी। इसके लिए एक विस्तृत फॉर्म में 40 सवाल होंगे, जिनमें उम्र, वैवाहिक स्थिति, धर्म, जाति, शिक्षा, रोजगार, पलायन और विकलांगता जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं।
देश की पहली डिजिटल जनगणना
यह महाभियान भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें सारा डेटा पारंपरिक कागजों की जगह डिजिटल टूल्स और विशेष मोबाइल ऐप्स के जरिए इकट्ठा किया जाएगा। इससे डेटा संकलन में अभूतपूर्व तेजी और सटीकता आएगी। केंद्र सरकार ने इस विशाल अभियान के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है। इस राष्ट्रव्यापी जनगणना के दायरे में देश के सभी 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आएंगे, जिसमें 7,092 उप-जिले, 5,128 वैधानिक शहर, 4,580 जनगणना शहर और लगभग 6.39 लाख गांव शामिल किए गए हैं।