अल्मोड़ा की बेटियों का कमाल: शीतलाखेत की छात्राओं ने भीमल की छाल से बनाया हर्बल शैम्पू, जानें खासियत

​अल्मोड़ा: पहाड़ के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक उद्यमिता से जोड़कर उत्तराखंड की दो होनहार बेटियों ने एक नई मिसाल पेश की है।

तैयार किया शैम्पू

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजकीय महाविद्यालय शीतलाखेत की छात्राओं रश्मि आर्या और सुहानी आर्या ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) काशीपुर में आयोजित छह दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम में अपने बेहतरीन स्टार्टअप आइडिया से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। देवभूमि उद्यमिता योजना के तहत आयोजित इस बूटकैंप में छात्राओं ने स्थानीय वनस्पति ‘भीमल’ से तैयार हर्बल शैम्पू का शानदार प्रस्तुतिकरण दिया। छात्राओं द्वारा तैयार किए गए इस हर्बल शैम्पू में पारंपरिक और प्राकृतिक घटकों का बेहतरीन संयोजन देखने को मिला है। शैम्पू में भीमल के अर्क के साथ मुख्य रूप से रीठा, आंवला और रोजमेरी का इस्तेमाल किया गया है।
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​सुरक्षित है उपयोग

​इस स्टार्टअप की शुरुआत 10 अप्रैल 2026 को शीतलाखेत महाविद्यालय में आयोजित देवभूमि उद्यमिता योजना के ओरिएंटेशन शिविर से हुई थी। इसके बाद हवालबाग में अगस्त माह में प्रथम और 25 से 31 अक्टूबर तक आईआईएम काशीपुर में आयोजित दूसरे बूटकैंप में छात्राओं ने गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्तमान में ये छात्राएं अपने घर के आसपास मौजूद 30 से 32 भीमल के पेड़ों से छाल और पत्तियों का प्राकृतिक अर्क जुटाती हैं। छात्राओं का दावा है कि शुरुआती परीक्षणों में बालों की बनावट में सुधार और बाल झड़ने की समस्या में सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद इस उत्पाद को विधिवत रूप से विकसित किया गया है। इस हर्बल शैम्पू की 50 और 100 मिलीलीटर की आकर्षक पैकिंग तैयार की है, जो बिना किसी हानिकारक केमिकल के लगभग छह महीने तक उपयोग के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।

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