अल्मोड़ा: सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा की ऐतिहासिक पहचान और समृद्ध धार्मिक परंपरा का प्रतीक श्री लक्ष्मी भंडार हुक्का क्लब की रामलीला में रावण-मंदोदरी संवाद, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति तथा कालनेमि प्रसंग का भव्य, भावपूर्ण एवं प्रभावशाली मंचन किया गया।
रहें मुख्य अतिथि
जिसमें कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय, ओजस्वी संवादों, उत्कृष्ट भावाभिव्यक्ति और शानदार मंच प्रस्तुति से उपस्थित दर्शकों को रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों से रूबरू कराया। रामलीला के दौरान कहीं वीर रस की गर्जना सुनाई दी, तो कहीं प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण के प्रति प्रेम, समर्पण तथा भ्रातृभाव के मार्मिक दृश्यों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में दर्जा राज्य मंत्री कुंदन लटवाल उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में अल्मोड़ा के महापौर अजय वर्मा, जिलाधिकारी अंशुल सिंह तथा प्रकाश बिष्ट शामिल रहे।
कलाकारों का शानदार अभिनय
ऐतिहासिक हुक्का क्लब की रामलीला के प्रति लोगों का उत्साह और कलाकारों के प्रति दर्शकों का स्नेह अल्मोड़ा की सांस्कृतिक परंपरा के प्रति जनमानस के जुड़ाव को दर्शाता है। रावण-मंदोदरी संवाद के मंचन में रावण की पत्नी मंदोदरी द्वारा उसे समझाने और विनाश के मार्ग से लौटने की सलाह देने का प्रसंग प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। मंदोदरी रावण को प्रभु श्रीराम की शक्ति और मर्यादा का स्मरण कराते हुए माता सीता को सम्मानपूर्वक वापस लौटाने की सलाह देती हैं। इसके बावजूद रावण का अहंकार उसे सत्य स्वीकार करने से रोकता है। कलाकारों ने इस प्रसंग के माध्यम से दर्शाया कि जब व्यक्ति सत्ता, शक्ति और अपने सामर्थ्य के मद में विवेक खो देता है, तो उसका पतन निश्चित हो जाता है। संवादों और अभिनय ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि जीवन में शक्ति से अधिक महत्वपूर्ण विवेक, मर्यादा और सत्य का सम्मान हैं,अंगद-रावण संवाद रामलीला के प्रमुख आकर्षणों में रहा। प्रभु श्रीराम के दूत के रूप में लंका पहुंचे अंगद का निर्भीक व्यक्तित्व, उनकी स्पष्ट वाणी और श्रीराम के प्रति अटूट निष्ठा का कलाकारों ने शानदार प्रदर्शन किया। रावण के दरबार में अंगद द्वारा उसे समझाने और युद्ध से बचने का अवसर देने का प्रसंग दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण बना। एक ओर रावण का अहंकार और दूसरी ओर अंगद का आत्मविश्वास एवं धर्म के प्रति समर्पण मंच पर जीवंत हो उठा। ओजस्वी संवादों और प्रभावी अभिनय ने वातावरण को वीर रस से भर दिया। इस प्रसंग ने यह संदेश दिया कि सच्ची वीरता केवल युद्ध करने में नहीं, बल्कि सत्य के पक्ष में निर्भीक होकर खड़े रहने में भी है। लक्ष्मण शक्ति प्रसंग का मंचन अत्यंत मार्मिक रहा। युद्धभूमि में मेघनाद द्वारा शक्ति प्रहार किए जाने से लक्ष्मण के मूर्छित होने और उन्हें इस अवस्था में देखकर प्रभु श्रीराम के व्याकुल होने का दृश्य दर्शकों के हृदय को स्पर्श कर गया। अपने अनुज लक्ष्मण के प्रति श्रीराम का प्रेम, उनकी चिंता और भावनात्मक पीड़ा को कलाकारों ने संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया। इस प्रसंग में राम और लक्ष्मण के बीच का भ्रातृप्रेम तथा एक-दूसरे के प्रति समर्पण विशेष रूप से उभरकर सामने आया। दर्शकों ने इस मार्मिक दृश्य को भावपूर्ण वातावरण में देखा और कलाकारों के अभिनय की सराहना की।कालनेमि प्रसंग में हनुमान जी के अदम्य साहस, बुद्धिमत्ता और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट भक्ति का सुंदर चित्रण किया गया। लक्ष्मण के प्राणों की रक्षा के लिए संजीवनी बूटी लाने की जिम्मेदारी निभाते हुए हनुमान जी के सामने आने वाली बाधाओं और कालनेमि के छल को पहचानने का प्रसंग रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
अहम योगदान
कलाकारों ने इस दृश्य के माध्यम से यह संदेश दिया कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी धैर्य, विवेक और लक्ष्य के प्रति समर्पण बनाए रखना चाहिए। हनुमान जी का चरित्र आज भी सेवा, साहस, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता की प्रेरणा देता है।श्री लक्ष्मी भंडार हुक्का क्लब की रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अल्मोड़ा की ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक सहभागिता का महत्वपूर्ण प्रतीक है। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए संस्था के कलाकार, पदाधिकारी और कार्यकर्ता निरंतर परिश्रम करते हैं। पात्रों के अभिनय से लेकर मंच व्यवस्था, रूप सज्जा, वेशभूषा, पार्श्व गायन और अन्य व्यवस्थाओं तक अनेक लोगों का समर्पण इस आयोजन को सफल बनाता है। रामलीला के माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों, सत्य, त्याग, कर्तव्य, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है,आयोजन को सफल बनाने में संस्था के सचिव विनीत बिष्ट,संयोजक राजेंद्र तिवारी सहित त्रिभुवन गिरी, हर्षवर्धन वर्मा, मीनाक्षी साह अग्रवाल, मीनाक्षी जोशी, ललित मोहन साह, मनोज साह, भरत गोस्वामी, कंचन बिष्ट, अभय उप्रेती, मणिकरण गुप्ता, मानस वाणी, पारस, अभय उप्रेती,रोहित साह, हरेंद्र वर्मा, चंद्रशेखर कांडपाल, जगत मोहन जोशी, अभय साह, विनोद गिरी, मिश्रा, चंदन आर्य, गौरव तिवारी, विजय चौहान, आकांक्षा, नीलम भट्ट, गीता तिवारी एवं हर्षिता तिवारी सहित संस्था के अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।हुक्का क्लब की रामलीला का प्रत्येक प्रसंग दर्शकों को भारतीय संस्कृति, आदर्शों और जीवन मूल्यों से जोड़ता है। संस्था का प्रयास है कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ अल्मोड़ा की इस ऐतिहासिक परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक उसी श्रद्धा, उत्साह और गरिमा के साथ पहुंचाया जाता रहे।