अल्मोड़ा: सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा का सुप्रसिद्ध 209वां ऐतिहासिक मां नंदा देवी मेला आज बुधवार को भव्य और भावुक शोभायात्रा के साथ संपन्न हो गया।
निकली भव्य शोभायात्रा
जिसमें सात दिनों तक चले इस धार्मिक महोत्सव के अंतिम दिन पूरा नगर मां नंदा-सुनंदा की भक्ति और आस्था के रस में सराबोर नजर आया। ध्याणी (बेटी) के रूप में पूजी जाने वाली मां नंदा-सुनंदा को बेटियों की तरह पारंपरिक रीति-रिवाजों से सजा-धजाकर मायके से ससुराल के लिए विदा किया गया। आज बुधवार को नंदा देवी मंदिर परिसर में डोला उठते ही श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। मंदिर परिसर का एक चक्कर पूरा करने के बाद शोभायात्रा पारंपरिक मार्ग—बंसल गली, शिखर तिराहा, माल रोड, मुख्य बाजार, लोहे का शेर, कचहरी बाजार, थाना बाजार, पलटन बाजार, सिद्धनौला और कैंट से होते हुए दुगालखोला पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने जय मां नंदा-सुनंदा के गगनभेदी जयकारे लगाए। महिलाओं ने छतों से अक्षत एवं पुष्प वर्षा कर सुख-समृद्धि और मनचाहे वरदान की कामना की। इस दौरान महिलाओं द्वारा गाए गए मांगलिक और विदाई गीतों ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक और भावुक बना दिया।
सदियों पुरानी परंपरा
209 वर्षों के लंबे सफर में भले ही अल्मोड़ा शहर का स्वरूप बदल गया हो, लेकिन मां के डोले की विदाई का मार्ग आज भी वही सदियों पुराना और पारंपरिक है। कठिन रास्तों के बावजूद श्रद्धालुओं में मां के डोले को कंधा देकर आशीर्वाद लेने की होड़ मची रही। देर शाम दुगालखोला में पूर्ण विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मूर्तियों का विसर्जन किया गया।
बलि प्रथा की जगह निभाई गई ‘भूज की बलि’ की परंपरा
मान्यतानुसार, पूर्व में मेले के अंतिम दिन भैंसे की बलि देने की परंपरा थी, जिसे न्यायालय के आदेश के बाद समाप्त कर दिया गया था। अब इस परंपरा के विकल्प के रूप में ‘भूज’ (कद्दू/पेठा) की बलि दी जाती है। इस बार भी शोभायात्रा की शुरुआत से पूर्व मंदिर की सीढ़ियों के पास भूज की बलि देकर धार्मिक रस्म को पूरा किया गया।
रहें मौजूद
समापन अवसर और शोभायात्रा में मेला समिति के अध्यक्ष मनोज वर्मा, विधायक मनोज तिवारी, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, दर्जा राज्य मंत्री कुंदन लटवाल, पूर्व पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, गोविंद सिंह पिलख्वाल, बिट्टू कर्नाटक, अर्जुन बिष्ट, रवि रौतेला, महेश नयाल, त्रिलोचन जोशी, मनोज सनवाल, ललित लटवाल, लता तिवारी, अनूप साह, संजय साह सहित भारी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।