अल्मोड़ा: अदालत ने चोरी के मामले में सुनाया फैसला, कहा- शक और कमजोर सबूत दोषी ठहराने को काफी नहीं

अल्मोड़ा: नगर के एक बार में हुई चोरी के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) मोहम्मद याकूब की अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। जिसमें अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में अभियोजन को अपना केस संदेह से परे साबित करना होता है। महज शक या कमजोर सबूतों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने दो सगे भाइयों समेत तीन आरोपियों को बरी करने के आदेश दिए हैं।

जानें मामला

जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला अगस्त 2023 का है, जहाँ पुलिस ने आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ने और चोरी का माल बरामद करने का दावा किया था। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता चामू सिंह गस्याल और भगवती प्रसाद पंत ने पैरवी की। बताया कि 5 अगस्त 2023 की रात चोरों ने नगर के ‘शिवम बार एंड रेस्टोरेंट’ का ताला तोड़कर गल्ले से ₹15,000 की नकदी, 14 बोतल शराब और एक एसबीआई (SBI) की कार्ड स्वाइप मशीन चोरी कर ली थी। कोतवाली पुलिस ने अगले ही दिन ‘ब्राइट इन कॉर्नर’ के पास से तीन आरोपियों—पारस जोशी, उसके भाई लक्षित जोशी और आलोक कुमार उर्फ अक्कू (सभी निवासी अल्मोड़ा) को गिरफ्तार करने का दावा किया था। पुलिस ने कहा था कि आरोपी सीसीटीवी में कैद हुए हैं और उनके पास से चोरी की रकम व सामान भी बरामद हुआ है।

अदालत का फैसला

अदालत में पुलिस के दावों में गंभीर विरोधाभास देखने को मिले। जिसमें अपूर्ण डिजिटल साक्ष्य (CC TV फुटेज अमान्य)
​पुलिस ने कोर्ट में जो सीसीटीवी फुटेज और पेन ड्राइव सौंपी थी, उसके साथ लगा कानूनी सर्टिफिकेट (65B) अधूरा था। उसमें यह दर्ज नहीं था कि पेन ड्राइव कहाँ और किस माध्यम से तैयार की गई। पुलिस इस सर्टिफिकेट को कोर्ट में कानूनी रूप से साबित भी नहीं कर सकी। इसके अलावा, फुटेज में संदिग्धों के चेहरे और सामान साफ नहीं दिख रहे थे। शराब की बोतलों का बैच नंबर गायब था। कोर्ट में रेस्टोरेंट मैनेजर ने माना कि हर बोतल पर एक विशिष्ट बैच नंबर होता है। इस चूक के कारण पुलिस यह साबित ही नहीं कर पाई कि बरामद शराब उसी रेस्टोरेंट से चुराई गई थी। इसके अलावा पुलिस टीम ने थाने से घटनास्थल के लिए निकलने का मौखिक दावा किया, लेकिन उसकी कोई भी प्रमाणित प्रति (रिकॉर्ड) कोर्ट में पेश नहीं की गई। जिस आधार पर अदालत ने अपना फैसला सुनाया।