अल्मोड़ा: पिच से खेतों तक: कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी खेल चुके क्रिकेटर सूरज नयाल की अनूठी पहल, पेश की ‘रिवर्स माइग्रेशन’ की मिसाल


अल्मोड़ा:‌क्रिकेट के मैदान पर चौके-छक्के लगाने वाले उत्तराखंड के होनहार खिलाड़ी सूरज नयाल अपनी खास पहल से चर्चा में बने हुए हैं।

युवक की खास पहल

कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी (अंडर-23/25) में राज्य का प्रतिनिधित्व कर चुके सूरज ने खेल के मैदान से हटकर खेती-किसानी की राह चुनी है। उन्होंने पहाड़ों से हो रहे पलायन के जख्म पर मरहम लगाते हुए युवाओं के सामने ‘रिवर्स माइग्रेशन’ की एक अनूठी मिसाल पेश की है। हवालबाग ब्लॉक के मैगड़ी गांव (तोक दूणी) निवासी सूरज नयाल का बचपन दिल्ली में बीता और वहीं से उन्होंने अपनी पूरी शिक्षा प्राप्त की। उनके पिता बालम सिंह एक पूर्व सैनिक हैं। साल 2008 से क्रिकेट की दुनिया में कदम रखने वाले सूरज ने स्कूल नेशनल स्तर पर उत्तराखंड और दिल्ली दोनों का प्रतिनिधित्व किया और अपनी प्रतिभा के दम पर तीन गोल्ड मेडल भी जीते।

शुरू की आधुनिक खेती

क्रिकेट में शानदार करियर के बावजूद, साल 2024 में सूरज ने अपने भाई संतोष नयाल के साथ मिलकर अपने पैतृक गांव लौटने का फैसला किया। सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे इस गांव में अब महज 17 परिवार ही बचे हैं। दोनों भाइयों ने ठान लिया कि वे वर्षों से बंजर पड़ी पुश्तैनी भूमि को फिर से आबाद करेंगे और करीब 6 महीने की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने खेतों को दोबारा कृषि योग्य बना दिया। सूरज और संतोष ने पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक और नकदी फसलों पर ध्यान केंद्रित किया है। जिसमें उद्यान विभाग की योजना के तहत उन्होंने 8 नाली भूमि में कीवी के 50 पौधे रोपे हैं। साथ ही आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए 10 नाली भूमि में सेब के 500 पौधों का रोपण किया गया है। दोनों भाई जापानी फल ‘पर्सिमन’ (Persimmon) और जैविक सब्जियों का भी बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहे हैं। अकेले सब्जियों से उन्हें सालाना करीब 50 हजार रुपये की आय हो रही है। इस पूरे कल्पवृक्ष जैसे स्वरोजगार को खड़ा करने में भाइयों ने करीब 25 से 30 लाख रुपये का निवेश किया है। साथ ही गांव के 20 से अधिक स्थानीय लोगों को सीधे रोजगार भी मिला है। साथ ही कहा कि जंगली जानवरों का आतंक भी बड़ी समस्या बना हुआ है। आज के समय में पहाड़ों में खेती को इन जंगली जानवरों से बचाना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।