अल्मोड़ा: मई में आयोजित होगी राष्ट्रीय लोक अदालत, आपसी समझौते से होगा मुकदमों का निपटारा





अल्मोड़ा: जनपद अल्मोड़ा के सभी न्यायालयों में राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित होने जा रही है, जिसमें वादों का निस्तारण सुलह समझौतें के आधार पर कराया जा सकता है।


दी यह जानकारी


वादकारियों व जनता से अनामिका सिंह, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अल्मोड़ा द्वारा यह अपील की गयी है की जो भी व्यक्ति अपने मामले को राष्ट्रीय लोक अदालत दिनांकित 09.05.2026 के माध्यम से निस्तारित कराना चाहते है वह अपना मामला राष्ट्रीय लोक अदालत की तिथि से एक कार्य दिवस पूर्व तक भी किसी कार्य दिवस में संबंधित न्यायालय स्वयं या अधिवक्ता के माध्यम से आवदेन कर नियत कर सकते है।सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में केवल वही वाद नियत किये जाते है जिनका निस्तारण सुलह समझौतें के आधार पर विधि अनुसार किया जा सकता है तथा राष्ट्रीय लोक अदालत के विषय में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि न्यायालय में कोर्ट फीस जमा की जा चुकी है एवं वाद का निस्तारण राष्ट्रीय लोक अदालत में कराया जाता है, तो पक्षकार द्वारा जमा की गई कोर्ट फीस पूर्ण रूप से वापस की जाती है।


इन मामलों का निस्तारण


सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बताया गया कि निम्न मामलों का निस्तारण राष्ट्रीय लोक अदालत में किया जा सकता है-

1- फौजदारी शमनीय मामलें (जिसमें कानूनी रूप से राजीनामा हो सकें)

2- लेबर एवं नियोजन के विवाद

3- पैसे के लेनदेन के मामलें

4- विवाह से सम्बन्धित पति-पत्नी के विवाद (तलाक के मामलें को छोड़कर)

5- अन्य दीवानी मामलें जैसे किरायेदारी, व्यादेश, विनिर्दिष्ट अनुपालन आदि के मामलें

6- चैक बाउंस के मामलें

7- मोटर एक्सीडेंट के मुआवजे के मामलें

8- बिजली/पानी के बिलों के मामलें (शमनीय)

9- भूमि अधिग्रहण के मामलें (जो जिला न्यायालय में लम्बित हों)

10- राजस्व के मामलें (जो जिला न्यायालय में लम्बित हों)

11- उपभोक्ता फोरम में लम्बित वाद

12- मोटर वाहन अधिनियम के अधीन शमनीय प्रकृति के ट्रैफिक चलान

उपरोक्त के अलावा ऐसे मामलें भी निस्तारित किये जाएंगे जो अभी अदालत में आये ही नही, जैसे-

1- चैक बाउंस के विवाद

2- रूपयों के लेनदेन का विवाद

3- लेबर एवं नियोजन विवाद

4- बिजली, पानी, फोन के बिलों का विवाद

5- भरण-पोषण का विवाद

6- अन्य फौजदारी(शमनीय) एवं दीवानी विवाद।