अल्मोड़ा: पीएमओ के हस्तक्षेप और आरटीआई अपील पर लोनिवि मुख्यालय और शासन सख्त

अल्मोड़ा: अल्मोड़ा जनपद के अंतर्गत आने वाले चौमू गांव के निवासी राम सिंह पवार द्वारा जनहित और विकास कार्यों से जुड़े मामलों को लेकर मुद्दे उठाए।

उठाए यह मुद्दे
जिस पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के संदर्भों से लेकर सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत दायर प्रथम अपील पर लोक निर्माण विभाग (PWD) में उच्च स्तरीय कार्रवाई शुरू हो गई है। प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, कार्यालय मुख्य अभियंता, लोक निर्माण विभाग, अल्मोड़ा द्वारा पत्र संख्या 787 (दिनांक 27 मई 2026) के माध्यम से राम सिंह पवार के प्रार्थना पत्र पर कड़ा संज्ञान लिया गया है। इस पत्र के जरिए 01 जनवरी 2026 से 20 मई 2026 तक प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से प्राप्त समस्त संदर्भों को उच्च स्तर पर कार्रवाई हेतु शासन के सचिव, लोनिवि उत्तराखंड शासन को प्रेषित किया गया है। साथ ही, अधीक्षण अभियंता, प्रथम वृत्त, लोनिवि, अल्मोड़ा को निर्देशित किया गया है कि वे इस पूरे प्रकरण का अपने स्तर से गहन परीक्षण करें तथा नियमानुसार आवश्यक वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए की गई कार्रवाई से संबंधित पक्ष को भी अवगत कराएं।
​29 जून को होगी सुनवाई

​इस प्रशासनिक प्रक्रिया का दूसरा अहम पहलू सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 से जुड़ा है। आरटीआई अधिनियम की धारा 19(1) के अंतर्गत दायर प्रथम अपील (अपील संख्या: 27/US-PWD/2026) पर अनुसचिव एवं प्रथम विभागीय अपीयलीय अधिकारी, लोनिवि उत्तराखंड शासन, देहरादून द्वारा सुनवाई की तिथि तय कर दी गई है।
• ​सुनवाई की तिथि: 29 जून 2026
• ​समय: अपराह्न 4:00 बजे
• ​स्थान: अपीयलीय अधिकारी कक्ष, लोनिवि अनुभाग-2, उत्तराखंड शासन, सचिवालय, देहरादून
​डिजिटल सुनवाई की विशेष सुविधा

​प्रशासनिक पारदर्शिता और आम जनता की सुगमता को ध्यान में रखते हुए शासन ने यह सुनिश्चित किया है कि पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों को सुनवाई के लिए अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े। इस अपीयलीय अधिकारी दीपक कुमार द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि अपीलार्थी (श्री राम सिंह पवार) को व्यक्तिगत रूप से सचिवालय में उपस्थित होने में किसी प्रकार की कठिनाई हो, तो वे निर्धारित तिथि और समय पर मोबाइल नंबरों (9927699159 / 9897775802) के माध्यम से वॉयस कॉल या वीडियो कॉल से भी अपनी बात रख सकते हैं। साथ ही यह भी चेताया गया है कि सुनवाई में प्रतिभाग न करने की दशा में उपलब्ध साक्ष्यों और अभिलेखों के आधार पर अपील का अंतिम निस्तारण कर दिया जाएगा।
​प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में शासन और विभाग द्वारा दिखाई जा रही सक्रियता से क्षेत्रीय विकास कार्यों में पारदर्शिता आएगी और नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध व न्यायसंगत निस्तारण सुनिश्चित हो सकेगा।