खुशनुमा परवीन द्वारा स्वरचित कविता “दहेज एक अभिशाप”
दहेज एक अभिशाप हैदहेज एक अभिशाप है,इसको लेना सबसे बड़ा पाप है,बेटी ही ससुराल के लिए मान्य है,वर्तमान में दहेज एक बहुत बड़ा अभिशाप है,बेटी का मूल्य दहेज से कहीं ज्यादा है,दहेज एक दिखावा मात्र है, वास्तव मे बेटी ही कही ज्यादा मूल्यवान है,दहेज एक अभिशाप है,इसको लेना सबसे बड़ा…