आज 01 अप्रैल 2025 है। आज चैत्र नवरात्र का चौथा दिन है। इस बार दूसरी व तीसरी नवरात्रि 31 मार्च को मनाई गई। आज नवरात्रि का चौथा दिन है। नवरात्रि का चौथा दिन माँ कूष्मांडा को समर्पित होता है। कूष्मांडा स्वरूप की पूजा-साधना करने पर साधक के जीवन से जुड़े सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। मां को सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति भी कहा गया है।
नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा
सुबह स्नान करने के बाद मां की पूजा से पहले सभी देवी-देवताओं का आह्वान करें। सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर देवी कूष्मांडा का ध्यान करे। इसके बाद दुर्गा के कूष्मांडा रूप की पूजा करें। पूजा में मां को लाल रंग के पुष्प, गुड़हल या गुलाब अर्पित करें। इसके साथ ही सिंदूर, धूप, दीप और नैवेद्य भी माता को चढ़ाएं। माता के इस स्वरूप का ध्यान स्थान अनाहत चक्र है इसलिए देवी की उपासना में अनाहत चक्र के मिलते रंग जो हल्का नील रंग है उसी रंग के वस्त्रों को धारण करे। इससे माता के स्वरूप में ध्यान लगाएं।
ऐसा है मां का स्वरूप
मां कूष्मांडा के स्वरूप को आठ भुजाओं वाला माना जाता है।कूष्मांडा मां के हाथों में कमंडल, धनुष, कमल, पुष्प, अमृतकलश, गदा व चक्र आदि होते हैं। इसके साथ ही मां जपमाला रखती हैं और सिंह की सवारी करती हैं। मां कूष्मांडा देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं में है। इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दैदीप्यमान है। इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है। देवी कूष्मांडा को मान्यतानुसार रोग दूर करने वाली देवी भी कहते हैं और वे भक्तों को यश, बल व धन से समृद्ध कर देती हैं।
जानें यह पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, जब सृष्टि का अस्तित्व भी नहीं था तब चारो तरफ सिर्फ अंधकार ही था, उस समय माँ कूष्मांडा ने अपने मंद हास्य से सृष्टि की रचना की थी। कहते हैं कि ब्रह्मांड की रचना मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से की। मां के मुख मंडल पर फैली मंद मुस्कान से समस्त ब्रह्मांड प्रकाशवान हो उठा। ब्रह्मांड की रचना अपनी मुस्कान से करने के चलते जगत जननी आदिशक्ति को मां कूष्मांडा कहा गया है। मां का निवास स्थान सूर्य लोक है। शास्त्रों में कहा जाता है कि मां कूष्मांडा सूर्य लोक में निवास करती हैं। ब्रह्मांड की रचना करने वाली मां कूष्मांडा के मुखमंडल पर उपस्थित तेज से सूर्य प्रकाशवान है। मां सूर्य लोक के अंदर और बाहर सभी जगहों पर निवास कर सकती हैं। इसलिए माँ कूष्मांडा की पूजा से जीवन में सभी प्रकार की शक्ति और ऊर्जा प्राप्त होती है।
इन मंत्रों का करें उच्चारण
कूष्मांडा: ऐं ह्री देव्यै नम:
वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्विनीम्॥
मंत्र: या देवि सर्वभूतेषू सृष्टि रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: