बाल श्रम उन्मूलन सप्ताह का आयोजन: 20 जून तक 75 स्थानों पर चलेगा देशव्यापी बचाव अभियान

बच्चों से जुड़ी तमाम समस्याओं में बाल श्रम की समस्या भी एक जटिल विषय है। दरअसल, कम उम्र में श्रम में लगे बच्चों का व्यतिगत विकास रुकने के साथ-साथ देश और समाज पर भी व्यापक असर पड़ता है। देश में बच्चों के अधिकारों को सुनिश्चित करने बाल श्रम की समस्या पर ध्यान देने के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) विशेष अभियान चला रहा है। इसके लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग 12 से 20 जून के दौरान बाल श्रम उन्मूलन सप्ताह मना रहा है। यह अभियान विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के उपलक्ष्य में ‘‘भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ’’ – ‘‘आजादी का अमृत महोत्सव’’ के हिस्से के रूप में मनाया जा रहा है।

75 स्थानों पर चलेगा बचाव अभियान

आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत मनाए जा रहे इस श्रम उन्मूलन सप्ताह का आयोजन विभिन्न जिलों में बाल श्रम की समस्या पर ध्यान देने और इसे खत्म करने के तरीके खोजने के लिए किया जा रहा है। इस दौरान देश भर के स्क्रैप और ऑटोमोबाइल बाजारों में 75 स्थानों पर बचाव अभियान चलाया जाएगा जहां बच्चे श्रम कार्य में शामिल हैं। इस संबंध में राज्य आयोग, जिला अधिकारियों, बाल कल्याण समिति, चाइल्ड लाइन, पुलिस, श्रम विभाग और अन्य हितधारकों की सहायता से बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

सौदा तैयार करने के लिए बैठक

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आयोजित देशव्यापी बचाव कार्यों के लिए मसौदा तैयार करने के लिए 18 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 800 से अधिक अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया। बैठक में बचाव कार्यों के लिए मसौदा तैयार करने के साथ-साथ बाल श्रम मामलों के शिकार बच्चों की जांच और पुनर्वास के लिए निर्धारित प्रक्रिया की समझ को सरल बनाने का प्रयास किया गया है। इसके अतिरिक्त आयोग NCPCR के बाल स्वराज पोर्टल में बाल श्रमिकों के बचाव और पुनर्वास की प्रक्रिया के लिए एक अलग लिंक बनाने की प्रक्रिया में है। लिंक बनाने के पश्चात श्रम कार्यों में लगे बच्चों के पुनर्वास की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

चल रहे कई कार्यक्रम

NCPCR बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर फैसले लेते रहता है। इसी क्रम में पिछले दिनों बच्चों में नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के दुरुपयोग और तस्करी को रोकने के लिए “एक युद्ध नशे के विरुद्ध” विषय पर संयुक्त कार्य योजना शुरू करने के सम्बंध में राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा-सह-परामर्श किया। यह संयुक्त कार्य योजना एक नीतिगत दस्तावेज है, जिसे पहले से विद्यमान विभिन्न कानूनों, नियमों, नीतियों और कार्यक्रमों के आधार पर तैयार किया गया। यह पहल इसलिए की गई है, ताकि स्कूलों, जिलों आदि के स्तर से लेकर विभिन्न स्तरों तक कार्रवाई का एक समग्र मंच तैयार हो सके तथा जिसके आधार पर विभिन्न विभागों और प्राधिकारों को कार्रवाई करने का अधिकार मिले।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का गठन भारत सरकार द्वारा बाल अधिकारों के संरक्षण से संबंधित है। NCPCR बाल अधिकारों के सिद्धांत पर जोर देता है और देश की सभी बाल संबंधित नीतियों में को पहचानता है। आयोग के लिए, 0 से 8 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों का संरक्षण समान महत्व है। इसमें ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है जो पिछड़े या समुदायों या कुछ परिस्थितियों में बच्चे हैं, और इसी तरह NCPCR को बच्चों को मिलने वाले हर अधिकार को पारस्परिक रूप से मजबूत करने के रूप में देखा जाता है।