August 16, 2022

रक्षा मंत्री ने देश की सुरक्षा से जुड़ी कही, कई अहम बातें

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को आयोजित एक व्याख्यान के दौरान ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ विषय पर अपने सम्बोधन के दौरान देश की सुरक्षा से जुड़ी कई अहम बातें कही।

रक्षा मंत्री ने विभाजन विभीषिका को लेकर कही यह बात

शुरुआत में उन्होंने कहा, सबसे पहले मैं स्वर्गीय बलराम दास टंडन जी की स्मृति को नमन करता हूं जिन्होंने अपने जीवनकाल में इस देश का बहुत ही कठिन समय देखा। उन्होंने देश के विभाजन की विभीषिका को बहुत करीब से देखा। वह दौर, नफरत और हिंसा का ऐसा दौर था जिसे हम चाह कर भी नहीं भूल सकते। आगे जोड़ते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, आज इतने वर्षों बाद भी उसकी पीड़ा देश में महसूस की जाती है। इसलिए 1947 में हुए देश के विभाजन के बाद जो लोग हिंसा और नरसंहार के शिकार हुए, उनकी स्मृति में इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने, हर साल 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

2,200 साल पहले चाणक्य ने जाना राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्व

रक्षा मंत्री ने कहा, भारत के इतिहास में राष्ट्रीय सुरक्षा को एक व्यापक दृष्टि से यदि किसी ने पहली बार देखा तो आज से करीब 2200 साल पहले आचार्य चाणक्य ने देखा। राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर जिस तरह के विचार उन्होंने अपनी पुस्तक ‘अर्थशास्त्र’ में रखे हैं वे आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने पहले रहे है। राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति संवेदनशील रहना हर सरकार की पहली आवश्यकता ही नहीं बल्कि उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता भी होती है। जब हम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की बात करते हैं तो सबसे पहले बात सीमाओं की सुरक्षा की आती है क्योंकि यदि सीमाएं सुरक्षित नही होंगी तो राष्ट्र भी सुरक्षित नही होगा।

75 साल में बहुत सारी चुनौतियों का किया सामना

पिछले लगभग 75 साल में Land और Maritime Boundaries पर हमें बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। मगर हमारी सेनाओं और सुरक्षा बलों ने, मिलकर, हर चुनौती का न केवल डटकर सामना किया है बल्कि उन पर विजय भी हासिल की है। जब से भारत आजाद हुआ है, कई भारत विरोधी ताकतों की यह लगातार कोशिश रही है कि या तो सीमाओं पर, या फिर सीमाओं के रास्ते से भारत के भीतर अस्थिरता का माहौल बनाया जाए। पाकिस्तान की जमीन से इसके लिए बड़े पैमाने पर लगातार कोशिश की गई है।

1965 और 1971 में पाकिस्तान को मिला सबक

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, 1965 में और 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच दो युद्ध हुए जिनमें पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा। इन युद्धों में मिली पराजय ने पूरी तरह यह साबित कर दिया कि भारत के साथ वे Full Scale War करने की स्थिति में नही है। भारत के साथ सीधे युद्ध न करने की अक्षमता ने पाकिस्तान को दो नीतियों पर काम करने के लिए मजबूर किया। एक तो उन्होंने एटमी रास्ता खोजने की दिशा में कदम बढ़ाए और दूसरी तरफ भारत को ‘Death of thousand cuts’ देने की नीति पर काम प्रारंभ किया।

सीमा सुरक्षा के लिए किसी भी चुनौती का जवाब देने की हमारी ताकत काफी बढ़ चुकी है

रक्षा मंत्री ने कहा, आज वायु सेना के पास राफेल जैसे युद्धक विमान आ चुके हैं और अब भारत की संप्रभुता, अखण्डता, सीमा सुरक्षा के लिए किसी भी चुनौती का जवाब देने की हमारी ताकत काफी बढ़ चुकी है। राष्ट्रीय सुरक्षा का ताना बाना तभी मजबूत होगा जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरों पर निर्भर न रहे। रक्षा बजट में भारतीय कंपनियों से सामान खरीदने के लिए अलग से भी बजट की व्यवस्था है।

कश्मीर में बचा खुचा आतंकवाद होगा समाप्त

आतंकवाद के मुद्दे पर रक्षा मंत्री ने कहा, आतंकवाद के सहारे पंजाब में हिंसा का जो दौर चलाया गया उसका खात्मा बहुत बड़ी कीमत देकर हुआ है। अब जम्मू और कश्मीर में इस आतंकवाद को रोकने की दिशा में पिछले सात साल से सेना और सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई चल रही है। मेरा मानना है कि कश्मीर में बचा खुचा आतंकवाद भी समाप्त होकर रहेगा। यह विश्वास मुझे इसलिए है क्योंकि धारा 370 और 35A के चलते वहां अलगाववादी ताकतों को जो मजबूती मिलती थी, वह अब खत्म हो गई है। आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सुरक्षा बलों के रिस्पॉन्स में पिछले सात साल में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वह बदलाव है सेना और सुरक्षा बलों के बढ़े हुए मनोबल और उनकी कार्रवाई के बदले हुए तौर-तरीकों का। चूंकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर हम न राजनीति करते है और न होने देते है इसलिए भारतीय सेना और सुरक्षा बलों में यह भरोसा पैदा हुआ है कि राष्ट्र रक्षा के कर्तव्य पालन में उन्हें खुली छूट रहेगी।