हल्द्वानी: छात्र राजनीति से ‘दर्जा राज्य मंत्री’ तक: हुकुम सिंह कुंवर (हुकम दा) की संघर्षपूर्ण यात्रा

हल्द्वानी: उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के अग्रणी योद्धा और जुझारू जननेता हुकुम सिंह कुंवर, जिन्हें प्रदेश में लोग ‘हुकम दा’ के नाम से जानते हैं, का राजनीतिक सफर आज के युवाओं के लिए एक मिसाल है। छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका सफर अब एक बड़ी जिम्मेदारी—’राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद’ के अध्यक्ष के रूप में एक नए मुकाम पर पहुंच गया है।

​जड़ों से जुड़ाव और छात्र राजनीति से की शुरुआत

​चंपावत जिले के लोहाघाट विकासखंड स्थित कमलेड़ी गांव के साधारण परिवार में जन्मे हुकुम सिंह कुंवर ने अपनी शिक्षा चंमदेवल, रौशाल और हल्द्वानी से पूरी की। युवावस्था में ही उन्होंने छात्र राजनीति में अपनी पहचान बनाई। वे हल्द्वानी डिग्री कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष और कुमाऊं यूनिवर्सिटी के छात्र महासंघ अध्यक्ष रहे। 1989 में अविभाजित उत्तर प्रदेश के दौरान हल्द्वानी विधानसभा से चुनाव लड़कर उन्होंने मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा।


​राज्य आंदोलन में निभाई ‘अग्रणी’ भूमिका

​1990 के दशक में जब अलग उत्तराखंड राज्य के लिए पहाड़ सुलग रहा था, तब हुकुम दा सड़कों पर उतरकर संघर्ष का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने न केवल राज्य की लड़ाई लड़ी, बल्कि 1997 में चंपावत जिले के गठन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हल्द्वानी डिग्री कॉलेज का सरकारीकरण हो, हल्द्वानी में सी-डॉट एक्सचेंज की स्थापना या फिर मंच-तामली-तल्लादेश और डांडा-मीडार जैसी महत्वपूर्ण सड़कों का निर्माण—ये सब उनके निरंतर संघर्ष का ही परिणाम हैं। उन्होंने उत्तराखंड शिक्षित बेरोजगार संगठन के माध्यम से युवाओं के लिए भी लंबी लड़ाई लड़ी। आंदोलन के बाद भी उनका संघर्ष थमा नहीं। वे ‘देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल’ के संस्थापक प्रदेश अध्यक्ष बने और व्यापारियों व पहाड़ के स्थानीय उत्पादों को बाजार दिलाने के लिए आवाज उठाई। इसके साथ ही, ‘संयुक्त उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा’ के माध्यम से उन्होंने आंदोलनकारियों को एकजुट रखा और उनके पेंशन, सम्मान और चिह्निकरण के लिए सरकार के साथ लगातार संवाद बनाए रखा।

​धामी सरकार में मिली बड़ी जिम्मेदारी

​मई 2026 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हुकुम सिंह कुंवर की सक्रियता और संघर्ष को सम्मान देते हुए उन्हें ‘राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद’ का अध्यक्ष नियुक्त किया, जिसके साथ उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा भी प्राप्त हुआ।


पदभार ग्रहण करते हुए कहीं यह‌ बात


यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि उन लाखों संघर्षशील आंदोलनकारियों और शहीदों के त्याग का सम्मान है जिन्होंने उत्तराखंड के लिए बलिदान दिया। 8 जून 2026 को देहरादून स्थित शहीद स्मारक पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्होंने विधिवत अपना कार्यभार संभाला। उनके साथ सुभाष बड़थ्वाल और चारू कोठारी को भी उपाध्यक्ष के रूप में परिषद में शामिल किया गया है।


​नई पारी की प्राथमिकताएं

​अध्यक्ष के रूप में हुकुम सिंह कुंवर ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य 2021 से लंबित पड़े आंदोलनकारियों के आवेदनों का त्वरित निस्तारण करना है। वे आंदोलनकारियों के लिए बनाए गए जटिल मानकों को सरल बनाने पर काम करेंगे ताकि हर संघर्षी को समय पर न्याय और सम्मान मिल सके।