हिन्दी भाषा के विकास में और तेजी से प्रगति के लिए नई दिल्ली में संसदीय राजभाषा समिति की 37वीं बैठक का आयोजन हुआ। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने की। इस अवसर पर समिति सदस्यों की सर्वसम्मति से समिति प्रतिवेदन के 11वें खंड को राष्ट्रपति के पास भेजने को मंजूरी दी गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मौजूदा राजभाषा समिति जिस गति से काम कर रही है इससे पहले शायद ही कभी इस गति से काम हुआ हो। उन्होंने कहा कि एक ही समिति के कालखंड में तीन रिपोर्ट का राष्ट्रपति के पास भेजा जाना सबकी एक बड़ी साझा उपलब्धि है।
विकास के तीन एजेंडे
बैठक में हिन्दी के विकास के लिए तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया गया। इनमें पहले से 11वें खंड तक की गई अनुशंसाओं के कार्यान्वयन के लिए जुलाई में एक बैठक आयोजित की जाएगी। दूसरे बिंदु के अंतर्गत, हिंदी की प्राथमिक जानकारी देने के लिए नौवीं कक्षा तक के छात्रों को हिंदी शिक्षण पर अधिक ध्यान देने पर बल दिया गया। तीसरे बिंदु में हिंदी शब्दकोश को नया बनाकर फिर से प्रकाशित करने का सुझाव दिया गया है। बैठक में की गई सिफारिशों के कार्यान्वयन की समीक्षा के लिए एक कार्यान्वयन समिति का गठन किया जाएगा।
अंग्रेजी का विकल्प हो हिन्दी
बैठक में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए अन्य स्थानीय भाषाओं से शब्दों को स्वीकार कर हिंदी को लचीला बनाने पर ध्यान दिया गया। साथ ही अन्य भाषा वाले राज्यों के नागरिकों से अपील की गई कि जब आपस में संवाद करें तो वह भारत की भाषा में हो। राजभाषा देश की एकता के लिए महत्वपूर्ण है इसलिए हिंदी की स्वीकार्यता स्थानीय भाषाओं की नहीं बल्कि अंग्रेजी के विकल्प के रूप में होनी चाहिए।
बढ़ रहा दायरा
हिंदी के महत्व को और अधिक बढ़ाने के लिए सरकार चलाने का माध्यम राजभाषा किया गया है। इससे हिन्दी के विस्तार में सहायता मिलेगी। केंद्र सरकार हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट का 70 प्रतिशत एजेंडा हिंदी में तैयार करती है। पूर्वोत्तर के आठों राज्यों में 22,000 हिंदी शिक्षकों की भर्ती की गई है। साथ ही पूर्वोत्तर के 9 आदिवासी समुदायों ने अपनी बोलियों की लिपियों को देवनागरी में कर लिया है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के सभी आठों राज्यों ने सहमति से स्कूलों में दसवीं कक्षा तक हिंदी को अनिवार्य कर दिया है।