पीएम मोदी ने शुक्रवार को पूर्ववर्ती अहोम साम्राज्य के जनरल और वीर योद्धा लासित बोरफुकन की 400वीं जयंती पर साल भर आयोजित कार्यक्रमों के समापन समारोह को विज्ञान भवन में संबोधित किया। केवल इतना ही नहीं पीएम मोदी ने इस अवसर पर ‘लचित बोरफुकन-असम के नायक जिन्होंने मुगलों को रोका’ नामक पुस्तक का भी विमोचन किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा, आज देश गुलामी की मानसिकता को छोड़ अपनी विरासत पर गर्व करने के भाव से भरा हुआ है। देश अपनी सांस्कृतिक विविधता को मना रहा है बल्कि अपनी संस्कृति के ऐतिहासिक नायक-नायिकाओं को गर्व से याद कर रहा है। इसी कड़ी में लासित बोरफुकन को भी याद किया जा रहा है।
मुगल विजयी वीर थे लासित बोरफुकन
PM मोदी ने कहा कि लासित बोरफुकन ऐसे वीर थे जिन्हें मुगल विजयी वीर कहा जाता है। उन्होंने हमेशा राष्ट्र प्रथम की भावना से काम किया। लासित बोरफुकन की 400वीं जयंती मनाना हमारे लिए गौरव की बात है। पीएम मोदी ने कहा कि हमें वीर लासित की 400वीं जन्म जयंती मनाने का सौभाग्य उस कालखंड में मिला है जब देश अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। यह ऐतिहासिक महोत्सव असम के इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय है।
भारत का इतिहास विजय का इतिहास
पीएम मोदी ने कहा कि भारत का इतिहास सिर्फ मुगलों का इतिहास नहीं है। भारत का इतिहास विजय का इतिहास है। भारत का इतिहास अत्याचारियों के विरुद्ध अभूतपूर्व शौर्य और पराक्रम दिखाने का इतिहास है। पीएम मोदी ने कहा कि लासित जैसे महान विभूतियां, भारत मां की अमर संतानें, इस अमृतकाल के संकल्पों को पूरा करने के लिए हमारी प्रेरणा हैं। पीएम ने कहा कि वह असम के उस धरती को प्रणाम करते हैं जिसने मां भारती को लासित बोरफुकन जैसे अदम्य वीर दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि आज दिल्ली के विज्ञान भवन में लासित बोरफुकन की 400वीं जयंती समारोह का आयोजन किया गया है। पीएम मोदी का प्रयास रहा है कि गुमनाम नायकों को उचित तरीके से सम्मानित करें। इसी के अनुरूप देश 2022 को लासित बोरफुकन की 400वीं जयंती वर्ष के रूप में मना रहा है।
सरायघाट के 1671 के युद्ध का नायक बने थे लासित बोरफुकन
लासित बोरफुकन असम के पूर्ववर्ती अहोम साम्राज्य में एक सेनापति थे। सरायघाट के 1671 के युद्ध का नेतृत्व कर औरंगजेब के नेतृत्व वाली मुगल सेना को असम पर कब्जा नहीं करने दिया था। उनके इसी शौर्य को याद करते हुए असम में 24 नवंबर को लासित बोरफुकन दिवस मनाया जाता है।