June 22, 2024

Khabribox

Aawaj Aap Ki

4 जनवरी: आज विश्व ब्रेल दिवस के तौर पर बनाई जाती है लुई ब्रेल की जयंती, जाने

आज 4 जनवरी है। हर साल 04 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस के तौर पर लुई ब्रेल की जयंती मनाई जाती है। इस दिन दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, नेत्र रोगों की पहचान, रोकथाम और पुनर्वास विषय पर बातें होती है। यह दिन दृष्टि बाधित और दृष्टि-विहीन लोगों के लिए मानवाधिकार हासिल करने में संचार के साधन के रूप में ब्रेल के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। 

लुई ब्रेल का 3 साल की उम्र में एक एक्सीडेंट में संक्रमण के बाद चली गयी थी आंखों की रौशनी-

ब्रेल भाषा के आविष्कारक लुई ब्रेल का जन्म फ्रांस में जनवरी 1809 को हुआ था | लुई ब्रेल का 3 साल की उम्र में एक एक्सीडेंट हो गया था जिसके कारण उनकी आंखों में संक्रमण हो गया था और उसी संक्रमण के बाद उनकी आंखों की रौशनी चली गई थी। नेत्रहीन होने के बावजूद उनका अकादमिक रूप में उनका प्रदर्शन बड़ा ही उत्कृष्ट रहा है, और उन्हें रायल इंस्टीट्यूट फॉर ब्लाइंड यूथ में पढ़ने जाने का मौका मिला। वहाँ पर उन्होंने दृष्टिहीन व्यक्तियों की पढ़ने लिखने में मदद करने के लिए एक स्पर्श कोड़ विकसित किया जिसे हम ब्रेल लिपि कहा जाता है।

आज के समय में काफी विकसित है ब्रेल लिपि-

6 जनवरी 1832 को लुई ब्रेल की मृत्यु हो गई, उस समय उनकी उम्र मात्र 43 वर्ष थी। उनकी मृत्यु के 16 वर्ष बाद 1668 में इस लिपि को प्रमाणिक मान्यता मिली। आज यह भाषा दुनियाभर में मान्य है और सभी नेत्रहीनों के लिए एक वरदान है। लुई ब्रेल और ब्रेल लिपि के सम्मान में भारत सरकार ने 4 जनवरी 2009 से डाक टिकट की शुरुआत की थी। लुई ब्रेल को सम्मान देने के लिए फ्रांस की सरकार ने उनकी जन्म शताब्दी के मौके पर उनके शव को उनकी कब्र से बाहर निकलवाकर दोबारा से पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफनाया गया था| आज के समय में ब्रेल लिपि में काफी विकास हुआ है आज यह तकनीक कम्प्यूटर तक पहुँच गयी है।

जाने क़्या होती है ब्रेल लिपि-

ब्रेल एक लेखन पद्धति है. यह नेत्रहीन व्यक्तियों के लिए सृजित की गई थी। ब्रेल एक स्पर्शनीय लेखन प्रणाली है। इसे एक विशेष प्रकार के उभरे कागज़ पर लिखा जाता है। इसकी संरचना फ्रांसीसी नेत्रहीन शिक्षक और आविष्कारक लुइस ब्रेल ने की थी। इन्हीं के नाम पर इस पद्धति का नाम ब्रेल लिपि रखा गया है। ब्रेल में उभरे हुए बिंदु होते हैं। इन्हें ‘सेल’ के नाम से जाना जाता है। कुछ बिन्दुओं पर छोटे उभार होते हैं। इन्हीं दोनों की व्यवस्था और संख्या से भिन्न चरित्रों की विशिष्टता तय की जाती है। ब्रेल की मैपिंग प्रत्येक भाषा में अलग हो सकती है। इस‍ लिपि में स्कूली बच्चों के लिए पाठ्यपुस्तकों के अतिरिक्त रामायण, महाभारत जैसे ग्रंथ छपते हैं। ब्रेल लिपि में कई पुस्तकें भी निकलती हैं।