10 जुलाई: राष्ट्रीय मत्स्यपालक दिवस आज: भारतीय जलीय कृषि में क्रांति के जश्न का दिन, आत्मनिर्भरता और नवाचार का भी प्रतीक

आज 10 जुलाई 2026 है। आज राष्ट्रीय मत्स्यपालक दिवस मनाया जाता है। हर साल 10 जुलाई को ‘राष्ट्रीय मत्स्यपालक दिवस’ मनाया जाता है। यह दिन प्रोफेसर डॉ. हीरालाल चौधरी और डॉ. के.एच. अलीकुन्ही द्वारा 1957 में विकसित ‘हाइपोफिसेशन’ तकनीक को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है, जिसने भारत में कृत्रिम प्रजनन को संभव बनाया था।

जानें इसके बारे में

यह दिवस जलीय कृषि में लगे किसानों, मछुआरों और उद्यमियों के योगदान को याद करने के लिए मनाया जाता है। मत्स्य पालन विभाग Department of Fisheries के अनुसार, यह क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार सृजन में बड़ी भूमिका निभाता है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत ट्राउट और कार्प मछली पालन स्थानीय आजीविका का एक प्रमुख और लाभदायक साधन बन गया है। राष्ट्रीय मत्स्यपलक दिवस वर्ष 1957 में प्रोफेसर डॉ. हीरालाल चौधरी और डॉ. के.एच. अलीकुन्ही द्वारा किये गए कार्यों की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने हाइपोफिसेशन तकनीक के माध्यम से भारतीय मत्स्य पालन में क्रांतिकारी परिवर्तन किया। इस तकनीक ने भारतीय मेजर कार्प्स में कृत्रिम प्रजनन और प्रजनन को संभव बनाया। यह वैज्ञानिक उपलब्धि भारत में अंतर्देशीय जलीय कृषि के विकास का मार्ग प्रशस्त करने वाली सिद्ध हुई।