विश्वविख्यात वनस्पति शास्त्री स्वर्गीय प्रो० यशपाल सिंह पांगती के चतुर्थ पुण्यतिथि पर प्रो० वाई०पी०एस० पांगती रिसर्च फाउण्डेशन के द्वारा “हिमालय के पर्यावरणीय चिंताएं नामक शीर्षक पर सेमीनार का आयोजन किया गया।
प्रो० सुनील नौटियाल को प्रो० वाई०पी०एस० पांगती मैमोरियल अवार्ड से किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के शुभारम्भ में फाउण्डेशन अध्यक्ष डा० बी०एस० कालाकोटी द्वारा सभी विद्वतजनों का स्वागत करते हुए उन्होंने प्रो० पांगती द्वारा हिमालयी क्षेत्र में किये गये उत्कृष्ट शोध कार्यों एवं उल्लेखनीय योगदानों से सभी को अवगत कराया। कार्यक्रम में हिमालयी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों एवं योगदान हेतु प्रो० सुनील नौटियाल निदेशक गोविन्द बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, अल्मोड़ा प्रो० एन० के० जोशी कुलपति कुमाऊँ विश्वविद्यालय श्री बी०डी० सुयाल पूर्व पी०सी०सी०एफ० हिमाचल प्रदेश को प्रो० वाई०पी०एस० पांगती मैमोरियल अवार्ड से सम्मानित किया गया।
जलवायु परिवर्तन से होने वाले दुष्परिणामों के मामले में भारत दुनिया का सातवां सबसे प्रभावित देश है
कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रो० जी०एस० रावत एवं प्रो० ललित तिवारी ने स्वर्गीय प्रो० यशपाल सिंह पांगती के सम्मान में गठित प्रो० वाई०पी०एस० पांगती रिसर्च फाउण्डेशन के उद्देश्यों के विषय से अवगत कराते हुए कार्यक्रम का संचालन किया। इसी क्रम में प्रो० सुनील नौटियाल निदेशक गोविन्द बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, अल्मोड़ा द्वारा मुख्य व्याख्यान दिया गया। उन्होने जलवायु परिवर्तन के कारकों एवं प्रभावों को गम्भीरता से लेने एवं भारत तथा चीन में जलवायु परिवर्तन द्वारा होने वाले इस पर विचार व्यक्त किये प्रो० नौटियाल ने बताया कि जलवायु परिवर्तन से होने वाले दुष्परिणामों के मामले में भारत दुनिया का सातवां सबसे प्रभावित देश है तथा विभिन्न अंतराष्ट्रीय रिपोटों के आधार पर भारत को गत 20 वर्षों में लगभग 80 से 100 अरब डालर का नुकसान हुआ है जबकि अमेरिका, चीन, जापान को क्रमशः 945, 500, 400 अरब डालर तक का आर्थिक नुकसान पहुंचा है।
हमारा भारत देश दुनिया के कुल कार्बन उत्पादन का केवल 7 प्रतिशत ही कार्बन उत्सर्जित करता है
साथ ही, प्रो० नौटियाल ने बताया कि वर्तमान में चीन विश्व का सबसे बढ़ा प्रदूषक देश बन गया है जिसका प्रदूषण विश्व के कुल प्रदूषण का लगभग 30 से 31 प्रतिशत है जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका कार्बन डाई आक्साइड के उत्सर्जन के साथ द्वितीय स्थान पर है, यह विश्व के कुल कार्बन उत्पादन का 15 प्रतिशत उत्सर्जित करता है। उन्होंने बताया कि हमारा भारत देश दुनिया के कुल कार्बन उत्पादन का केवल 7 प्रतिशत ही कार्बन उत्सर्जित करता है, जो कि चीन के कुल प्रदूषण के पाचवें भाग से थोड़ा ही कम है अतः सम्पूर्ण विश्व को वैश्विक जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, कार्बन उत्सर्जन आदि विविध बिन्दुओं पर गहन मंथन एवं उपाय की अत्यन्त आवश्यकता है।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में प्रो० उमा मेलकानिया, प्रो० भावना पाठक, प्रो० मीना पाण्डे, डा० जे०सी० कुनियाल, डा० आई डी भटट डा0 नीलू लोधियाल, डा० सुषमा टम्टा, डा० जी०सी० जोशी, डा० मदन एम० पाण्डे, डा० नवीन पाण्डे, डा० नन्दन मेहरा दीक्षा बोरा, पंकज पाठक आदि उपस्थित रहे ।
प्रो० सुनील नौटियाल को वाई०पी०एस० पांगती मैमोरियल अवार्ड मिलने पर खुशी जाहिर की
गोविन्द बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के समस्त वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों ने प्रो० सुनील नौटियाल को उत्कृष्ट शोध एवं पर्यावरण क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु प्रथम प्रो० वाई०पी०एस० पांगती मैमोरियल अवार्ड मिलने पर खुशी जाहिर की ।