मरीजों के लिए सस्ती जेनेरिक दवाएं लिखने के सख्त आदेश, ब्रांडेड दवाएं मिलेंगी सस्ती और उचित दामों में…

भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद के अनुसार देश के सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों को मरीजों के लिए सस्ती जेनेरिक दवाएं लिखने का सख्त आदेश दिया गया है। इससे रोगियों ब्रांडेड दवाएं सस्ती और उचित दामों पर मिलेगी। इसका उल्लंघन करने पर भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद के प्रावधानों के तहत डॉक्टरों और अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई होगी। इसके लिए भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद ने पहले ही सर्कुलर जारी कर बताया था, लेकिन यह जानकारी राज्यसभा की कार्यवाई के दौरान रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री भगवंत खुबा ने भी दोहराई है। इसके साथ ही सरकारी डॉक्टर्स को पर्चे में जेनरिक दवाओं के नाम कैपिटल लेटर के शुद्ध अक्षरों में लिखने का भी निर्देश दिया गया है। आइए जानते है जेनेरिक दवाएं क्या है और इसके लाभ….

जेनेरिक दवाएं क्या है और इसके लाभ

यह एक फार्मास्युटिकल उत्पाद है। जेनरिक दवाईयां नागरिकों को ब्रांडेड या अन्य फार्मा की दवाईयों के मुकाबले सस्ती मिलती है। इनकी गुणवत्ता बाकी फार्मा के दवाईयों के बराबर ही होती है। यह बिना किसी पेटेंट के बनायी जाती है। इनके डोज या साइड-इफेक्ट ब्रांडेड दवाओं की तरह ही होते हैं। गुणवत्ता मानक को चेक करने के बाद ही जेनेरिक दवाओं को बाजार में उतारा जाता है। भारत में सीजीएचएस स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के मेडिकल स्टोर संगठन के माध्यम से जेनेरिक दवाओं को खरीदता है। सभी जेनेरिक दवाओं का नाम पूरे विश्व में एक ही होता है। इन दवाओं की आपूर्ति पूरी दुनिया में होती है। इन दवाओं से मरीजों के जेब खर्च में काफी कमी आती है।

जेनेरिक दवाओं के बारें में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि यदि डॉक्टर मरीज को जेनेरिक दवाइयों की सलाह देने लगें तो केवल धनी देशों में चिकित्सा व्यय पर 70 प्रतिशत तक कमी आ जायेगी तथा गरीब देशों के चिकित्सा व्यय में यह कमी और भी ज्यादा होगी।

जानिए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर मरीजों के लिए सस्ती जेनेरिक दवाएं

प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र जेनेरिक सस्ती दवाओं के लिए खोला जा रहा है। यह योजना नागरिकों को सस्ते दामों पर उच्च गुणवत्ता की जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरु की गई है। इसकी शुरुआत 1 जुलाई 2015 को हुई थी। जन औषधि केंद्र पर देश के सभी नागरिकों को बाजार से 50-90 फीसदी कम कीमत पर दवाइयां दी जाती है। प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि योजना को सुगम बनाने के लिए “जनऔषधि सुगम” एक मोबाइल एप्लिकेशन है।

पीएम भारतीय जन औषधि योजना के तहत 1,616 दवाएं और 250 सर्जिकल उपकरण सस्ते दामों पर जनऔषधि केंद्रों पर उपलब्ध हैं। वर्तमान में पीएम-भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत 8,949 जनऔषधि स्टोर चल रहे हैं। सरकार ने मार्च 2024 तक प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्रों की संख्या को 10,000 तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

दवा कंपनियों के अनैतिक व्यवहार में कमी लाने के लिए UCPMP कोड

UCPMP कोड से फार्मा मार्केटिंग में अनैतिक व्यवहार जैसे दवा कंपनियां चिकित्सकों को ‘उनकी दवाएं’ लिखने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए नकद और अन्य उपहारों की पेशकश पर कमी आती है। सरकार ने देश की सभी दवा कंपनियों को सही ढंग से मार्केटिंग और उनके आचरण को नियंत्रित करने के लिए एक यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्युटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज को शुरू किया है। इसकी शुरुआत जनवरी 2015 में हुई थी। यह एक स्वैच्छिक कोड है। इसे फार्मा कंपनियों द्वारा लागू किया जाता है। यह यूनिफॉर्म कोड दवा कंपनियों, चिकित्सा प्रतिनिधियों, दवा कंपनियों के एजेंटों और फार्मास्यूटिकल्स संघों पर लागू होता है।

जानिए भारत में जेनेरिक दवा बनाने वाली कंपनियां

भारत में फार्मास्यूटिकल्स विभाग के तहत तीन पीएसयू पश्चिम बंगाल में बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड(BCPL), महाराष्ट्र में हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड(HAL)और कर्नाटक में कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (KAPL) जेनेरिक दवाएं बनाती हैं। जेनेरिक दवाओं और नई दवाओं को मैन्युफैक्चरिंग का लाइसेंस स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राज्य औषधि नियंत्रकों और भारत के औषधि महानियंत्रक द्वारा दिया जाता है।

भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम -1956 क्या है

भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम 1956 के 102 के तहत गठित भारतीय चिकित्सा परिषद (व्यावसायिक आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम, 2002, फार्मास्युटिकल और संबद्ध स्वास्थ्य क्षेत्र उद्योग के साथ डॉक्टरों और डॉक्टरों के पेशेवर को सहायता दी जाती है। इसके तहत किसी डॉक्टर या पेशेवर की किसी भी शिकायत का संबंधित राज्य चिकित्सा परिषदों द्वारा समाधान किया जाता है।

बता दें कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और अस्पताल संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य सरकार का विषय है। इससे मरीजों को जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने और इसके बारें में जागरुक करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।