11 मार्च: कालाष्टमी व्रत आज, भगवान शिव के अवतार काल भैरव की पूजा-अर्चना से दूर होती है नकारात्मक शक्तियां, बन रहे यह शुभ संयोग

आज 11 मार्च 2026 है। आज कालाष्टमी है। यह व्रत हर महीने पड़ती है। इस दिन विशेष रूप से कालभैरव बाबा की पूजा-अर्चना करने का विधान है। कालाष्टमी के दिन काल भैरव की पूजा की जाती है। कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि काल भैरव भगवान को समर्पित होती है। मान्यता है इस दिन विधि विधान से पूजा-अर्चना करने से नकारात्मक शक्तियों का अंत होता है और सभी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। काल भैरव भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं। दरअसल भैरव के तीन रूप हैं काल भैरव, बटुक भैरव और स्वर्णाकर्षण भैरव। कालाष्टमी  के दिन इनमें से काल भैरव की पूजा की जाती है।

जानें शुभ मुहूर्त

कालाष्टमी के दिन कालभैरव बाबा की पूजा के लिए संध्या काल और निशिता काल का मुहूर्त शुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च को देर रात 01 बजकर 54 मिनट पर होगी और 12 मार्च को सुबह 04 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। कालाष्टमी पर निशा काल में काल भैरव देव की पूजा की जाती है। निशा काल का शुभ मुहूर्त देर रात 11 बजकर 35 मिनट से 12 बजकर 23 मिनट तक है।
📌📌 ज्योतिषियों के अनुसार चैत्र माह की कालाष्टमी पर दुर्लभ शिववास योग का निर्माण हो रहा है। इस शुभ योग का संयोग 11 मार्च को देर रात 01 बजकर 54 मिनट से बन रहा है। वहीं, शिववास योग को समापन 12 मार्च को सुबह 04 बजकर 19 मिनट तक है। शिववास योग में काल भैरव देव की पूजा करने से दोगुना फल मिलेगा।

रूद्रावतार के रूप में हुई काल भैरव की उत्पत्ति

भगवान शिव के अंश काल भैरव की उत्पत्ति रुद्रावतार के रूप में हुई। शिव जी का अपमान करने पर काल भैरव प्रकट हुए थे और और ब्रह्म देव का एक सिर काट दिया था। काल भैरव इतने भयंकर और उग्र स्वरूप वाले हैं कि उनसे तो स्वयं काल भी भयभीत रहता है। आज के दिन काल भैरव की पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट, दोष और रोग दूर होते हैं। उनकी कृपा से अकाल मृत्यु का योग कट सकता है। आज काल भैरव के मंत्रों का जाप करने से सिद्धि प्राप्त होती है क्योंकि काल भैरव तंत्र और मंत्र के देवता हैं।