नैनीताल: आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) की देवस्थल स्थित 3.6 मीटर आप्टिकल दूरबीन (DOT) से आगामी 8 अक्टूबर से एक बार फिर ग्रह-नक्षत्रों और ब्रह्मांड के गूढ़ रहस्यों की खोज का काम शुरू हो रहा है।
रहस्यों की खोज
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मानसून सत्र की समाप्ति के बाद दूरबीन को दुरुस्त करने का काम अब अंतिम चरण में है। जिसमें देवस्थल दूरबीन के इंचार्ज एवं खगोल वैज्ञानिक डॉ. सौरभ शर्मा के अनुसार, हर साल मानसून के बाद अक्टूबर महीने से आब्जर्वेशन (प्रेक्षण) की शुरुआत की जाती है। इस बार पहले चरण में भारत और बेल्जियम के वैज्ञानिक संयुक्त रूप से अध्ययन और रिसर्च का काम करेंगे। साथ ही शोध संस्थान ने अगले चार महीनों के लिए वैज्ञानिकों का विस्तृत शेड्यूल जारी कर दिया है। इस दौरान दर्जनों खगोल विज्ञानी दूरबीन की मदद से ब्लैक होल, सक्रिय आकाशगंगाओं, सौरमंडल के बाहरी ग्रहों और तारों में होने वाले भीषण विस्फोटों (सुपरनोवा) पर अध्ययन करेंगे।
होगा यह खास
इस बार के शोध सत्र का मुख्य आकर्षण एक अंतरतारकीय धूमकेतु (Interstellar Comet) 3I/ATLAS रहेगा। वैज्ञानिक इस अनोखे धूमकेतु का अध्ययन कर यह पता लगाने का प्रयास करेंगे कि किसी दूसरे सौरमंडल से आने वाले पिंडों की बनावट और प्रकृति कैसी होती है।