February 2, 2023

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विश्वकर्मा जयंती 2022: विश्वकर्मा पूजा आज, जानें पौराणिक कथा और पूजन का शुभ मूहर्त

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देशभर में आज 17 सितंबर के दिन विश्वकर्मा जयंती मनाई जा रही है । हिंदू पंचाग के अनुसार आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन विश्वकर्मा पूजा की जाती है । हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है । विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर कहा जाता है क्योंकि जब सृष्टि की रचना हुई तो इसे सजाने संवारने का काम विश्वकर्मा ने ही किया था ।

पूरे देश के शिल्पकारों और कारीगरों के लिए है यह एक महत्वपूर्ण द

इस दिन सभी मशीनों कारखानों की पूजा की जाती है ।इस दिन वाहन पूजा का भी विधान है। साथ ही आज के दिन अस्त्र-शस्त्र का भी पूजन होता है ।  मान्यता है कि ऐसा करने से मशीनें, औजार और अस्त्र-शस्त्र कभी धोखा नहीं देते और लंबे समय तक आपका साथ निभाते हैं । यह पूरे देश के शिल्पकारों और कारीगरों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। देश के कुछ हिस्सों में, विशेष रूप से बिहार और कुछ उत्तरी राज्यों में, विश्वकर्मा पूजा दिवाली के बाद मनाई जाती है।

जानें पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार जब सृष्टि का निर्माण हो रहा था, तो वहां सर्वप्रथम भगवान विष्णु सागर में शेषशय्या पर प्रकट हुए। भगवान विष्णु के प्रकट होने के बाद उनकी नाभि कमल से चतुर्मुख भगवान ब्रह्मा दृष्टिगोचर हो गए थें। ब्रह्मा के पुत्र ‘धर्म’ और धर्म के पुत्र ‘वासुदेव’ थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ‘वस्तु’ से उत्पन्न ‘वास्तु’ सातवें पुत्र थे,जो शिल्पशास्त्र में बहुत ही बुद्धिमान थे। वासुदेव की पत्नी अंगिरसी’ ने भगवान विश्वकर्मा को जन्म दिया। आगे चलकर अपने पिता के तरह ही भगवान विश्वकर्मा भी वास्तुकला के अद्वितीय आचार्य बनें। प्राचीन काल में जितने भी सुप्रसिद्ध नगर और राजधानियां थीं, उनका सृजन भी विश्वकर्मा ने ही किया था । वो शिल्पकला के इतने बड़े मर्मज्ञ थे कि जल पर चल सकने योग्य खड़ाऊ बनाने की सामथ्र्य रखते थे।जैसे सतयुग का स्वर्ग लोक, त्रेतायुग की लंका, द्वापर की द्वारिका और कलियुग के हस्तिनापुर। महादेव का त्रिशूल, श्रीहरि का सुदर्शन चक्र, हनुमान जी की गदा, यमराज का कालदंड, कर्ण के कुंडल और कुबेर के पुष्पक विमान का निर्माण भी विश्वकर्मा ने ही किया था।

जानें पूजा का शुभ मूहर्त

पूजा के लिए तीन शुभ मुहूर्त शुभ मानें जा रहे हैं लेकिन विश्वकर्मा भगवान की पूजा आप दिन में कभी भी कर सकते हैं क्योंकि जंयती पूरे दिन रहेगी।

पहला मुहूर्त: 17 सितंबर 2022 को 07.39 AM – 09.11 AM

दूसरा मुहूर्त: 17 सितंबर 2022 को 01.48 PM – 03.20 PM

तीसरा मुहूर्त – 17 सितंबर 2022 को 03.20 PM – 04.52 PM