February 3, 2023

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गणेश चतुर्थी: आज से गणेशोत्सव की हो रही शुरुआत, जानें स्थापना के शुभ मुहूर्त

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आज 31 अगस्त 2022 है। आज गणेश चतुर्थी है। आज से गणेश चतुर्थी है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, आज ही के दिन भगवान श्री गणेश का जन्म हुआ था। माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र गणपति के जन्मदिवस के मौके पर 10 दिनों का उत्सव मनाया जाता है। आज से गणपति उत्सव की शुरुआत हो रही है।

गणेश चतुर्थी-

पूरे देश में गणेशोत्सव मनाया जा रहा है। इस दिन लोग अपने घरों में गणपति जी की प्रतिमा स्थापित करते हैं। 10 दिनों तक उनकी पूजा अर्चना की जाएगी और आखिरी दिन यानी अनंत चतुर्दशी को गणपति विसर्जन होगा। गणपति बप्पा की पूजा से बुद्धि, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है जो गणेश उत्सव में बप्पा की सच्चे मन से आराधना करता है उसका बेड़ा पार हो जाता है। गणपति की उपासना से सारे सकंट खत्म हो जाते हैं। महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी बड़े धूमधाम के साथ मनाई जाती है।

गणेश चतुर्थी की पौराणिक कथा-

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव और माता पार्वती नर्मदा नदी के किनारे बैठे थे। माता पार्वती ने वहां भगवान शिव से चौपड़ खेलने को कहा। भगवान शिव भी इस खेल को खेलने के लिए तैयार हो गए। लेकिन इस खेल में होने वाले हार-जीत का निर्णय कौन लेगा यह समझ नहीं आ रहा था, इसलिए भगवान शिव ने कुछ तीनके को इकट्ठा करके एक पुतला बनाया और उसमें जान डाल दी। जान डालते ही वह पुतला एक बालक बन गया। उसी बालक को इस खेल का निर्णय लेना था। अब भगवान शिव और माता पार्वती चौपड़ का खेल शुरू कर दिए। तीन बार चौपड़ का खेल खेला गया। हर बार माता पार्वती जीती, लेकिन भगवान शिव द्वारा निर्मित उस बालक ने भगवान शिव को ही विजय बताया। इस बात को सुनकर माता पार्वती बेहद क्रोधित हो गई और उन्होनें क्रोध में आकर उस बालक को लंगड़ा होने और कीचड़ में पड़े रहने का श्राप दे दिया। माता पार्वती के क्रोध से पुतला भयभीत हो गया और उसने अपनी गलती के लिए माता पार्वती से क्षमा मांगी। बालक ने कहा कि मां मुझसे अज्ञानता के कारण भूल हुआ है, मैंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया। बालक की बात सुन माता पार्वती भावुक हो गईं और उन्होंने बालक को श्राप से निजात पाने का उपाय बताया। उन्होंने कहा, यहां गणेश पूजन के लिए नाग कन्याएं आएंगी, उनके कहे अनुसार तुम भी गणेश पूजन करना। ऐसा करने से तुम क्षमा प्राप्त करोगे। यह कहकर मां पार्वती भगवान शिव के साथ कैलाश पर्वत पर चले गए। ठीक एक वर्ष बाद उस स्थान पर नाग कन्याएं आई। बालक ने नाग कन्याओं से भगवान गणेश के व्रत व पूजन की विधि पूछा। इसके बाद बालक ने 21 दिन तक गणेश जी का व्रत और पूजन किया। बालक की भक्ति भाव से गणेश जी प्रसन्न हुए और बालक को साक्षात दर्शन दिया। गणेश जी ने बालक से मनोवांछित फल मांगने को कहा। बालक ने कहा हे विनायक मुझे इतनी शक्ति दीजिए कि मैं अपने पैरों से चलकर कैलाश पर्वत पहुंच सकूं। गणेश जी ने बालक को ऐसा ही वरदान दिया। जब बालक कैलाश पर्वत पर पहुंचा तो शिवजी ने उससे पूछा कि तुम यहां कैसे पहुंचे। इसके बाद बालक ने भगवान शिव पूरी कथा सुनाई। बालक ने कहा कि माता पार्वती के बताए अनुसार मैनें गणेश जी का व्रत और पूजन किया, जिससे मुझे यह वरदान मिला। चौपड़ खेलने वाले दिन मां पार्वती भी भोलेनाथ से नाराज हो गई थी। ऐसे में भगवान शिव ने भी माता पार्वती को मनाने के लिए बालक के बताए अनुसार 21 दिनों तक गणेश जी का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से माता पार्वती के मन में भगवान शिव के लिए जो नाराजगी थी वो दूर हो गई और माता पार्वती प्रसन्न होकर कैलाश पर्वत लौट आईं। सभी कष्टों के निवारण और मनोकामना पूर्ति के लिए विघ्नहर्ता गणेश जी का यह कथा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

जानें शुभ मुहूर्त-

आज गणेश चतुर्थी पर गणेशजी की स्थापना और पूजा के लिए दिनभर में कुल 5 शुभ मुहूर्त रहेंगे। सुबह 11.20 बजे से दोपहर 01.20 बजे तक का समय सबसे अच्छा रहेगा, क्योंकि इस वक्त मध्याह्न काल रहेगा, जिसमें गणेश जी का जन्म हुआ था। जिसमें इस साल गणपति स्थापना का मुहूर्त सुबह 11 बजकर 05 से दोपहर 1 बजकर 38 मिनट तक है।