देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी खबर सामने आई हैं। बीते गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
जिसमें उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह मुस्लिमों में बहुविवाह और निकाह हलाला की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए ‘‘उचित स्तर’’ पर पांच न्यायाधीशों की नई संविधान पीठ का गठन करेगा।
निकाह हलाला को रद्द करने का किया आग्रह
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मुद्दे पर जनहित याचिका दायर करने वाले वकील अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच से आग्रह किया था। जिसमें कहा गया था कि भारतीय दंड संहिता की धारा 494 चालबाजी, हलाला आदि की अनुमति देती है और इसे रद्द करने की आवश्यकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले साल 30 अगस्त को जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस हेमंत गुप्ता, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पांच जजों की बेंच ने इस याचिका पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से जवाब मांगा था। लेकिन जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस हेमंत गुप्ता का कार्यकाल पिछले साल 23 सितंबर और 6 अक्टूबर को पूरा हो गया और वो सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो गये। जिसके कारण मुस्लिमों में बहुविवाह और ‘निकाह हलाला’ संबंधी प्रथाओं के खिलाफ दायर आठ याचिकाओं पर सुनवाई के लिए बेंच को फिर से गठित किया जाना था।
जानें क्या है निकाह हलाला
इस्लाम में औरत को तीन तलाक़ देने के बाद दोबारा उसी औरत से विवाह करने की प्रक्रिया को निकाह हलाला कहते हैं। यह विवाह (निकाह) मुख्य रूप से सुन्नी मुसलमानों के कुछ संप्रदायों द्वारा किया जाता है क्योंकि शरिया के मुताबिक अगर किसी पुरुष ने औरत को तीन तलाक दे दिया है तो उस पुरुष ने उस औरत का अपमान किया है, इस लिए अब वह पुरुष उस औरत से दोबारा तब तक शादी नहीं कर सकता जब तक वह औरत किसी दूसरे पुरुष से शादी कर तलाक न ले ले, दूसरे पति को तलाक देने पर मजबूर नहीं किया जा सकता, अगर वह तलाक देना न चाहे तो यह दोनों पति-पत्नी के रिश्ते के साथ जीवन बिताएंगे। अतः निकाह हलाला के लिए, तलाकशुदा महिला किसी दूसरे पुरुष से शादी कर लेती है, उस पुरुष के साथ विवाह की संसिद्धि करती है और तलाक लेती है ताकि उसे अपने पहले पति से पुनर्विवाह करना उचित हो सके। निकाह हलाला एक प्रक्रिया है जिसके हिसाब से अगर आपने अपनी पत्नी को तीन बार तीन तलाक दे दिया तो आप उससे तब तक दोबारा विवाह नहीं कर सकते जब तक वो एक बार फिर किसी और से शादी न कर ले।साथ ही वह अपने दूसरे पति के साथ शारीरिक संबंध भी बनाए।