05 नवंबर: गोवत्स द्वादशी आज, जानिए क्यों इस दिन वर्जित होता है गाय का दूध, संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि का है पर्व

आज 05 नवंबर 2026 है। आज गोवत्स द्वादशी है। गोवत्स द्वादशी को धनतेरस से एक दिन पहले मनाई जाती है। इसे वसु बारस, बछ बारस और नन्दिनी व्रत के नाम से भी जाना जाता है।

खास है महत्व

इस दिन गायों और बछड़ों की पूजा होती है। भारत के कई क्षेत्रों में गोवत्स द्वादशी के जैसा ही एक अन्य पर्व मनाया जाता है, जिसे बछ बारस के नाम से जाना जाता है। लेकिन यह पर्व गोवत्स द्वादशी से लगभग दो महीने पहले पड़ता है। इस त्योहार में भी गायों और बछड़ों की पूजा होती है। वसु बारस पर्व में गाय का दूध और उससे निर्मित पदार्थों का प्रयोग वर्जित माना जाता है। इस दिन संतान की उन्नति और दीर्घायु के लिये व्रत रखा जाता है। मान्यता है गोवत्स द्वादशी का व्रत रखने से संतान को दीर्घायु और सुखी जीवन की प्राप्ति होती है। इस पर्व में वसु नामक धन के अधिपति देवता की पूजा-अर्चना की जाती है, इसलिये इसे वसु बारस के नाम से भी जाना जाता है। यह गौ माता के विश्राम का दिन होता है इसलिए इस दिन गाय का दूध और उससे निर्मित पदार्थों का प्रयोग वर्जित होता है।

जानें शुभ मुहूर्त

गोवत्स द्वादशी (वसु बारस) का त्योहार इस साल 5 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग अनुसार गोवत्स द्वादशी तिथि 5 नवंबर की सुबह 10:35 से शुरू होकर 6 नवंबर 2026 की सुबह 10:30 बजे तक रहेगी। गोवत्स द्वादशी (वसु बारस) का शुभ मुहूर्त शाम 05:33 से शुरू होकर रात 08:10 बजे तक रहेगा।