April 21, 2024

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सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा द्वारा महापुरुष सोबन सिंह जीना जी की 112 वीं जयंती के अवसर पर कर्मयोगी महापुरुष सोबन सिंह जीनाः व्यक्तित्व एवं कृतित्व‘ विषय पर व्याख्यानमाला का आयोजन हुआ

सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा द्वारा महापुरुष सोबन सिंह जीना जी की 112 वीं जयंती के अवसर पर कर्मयोगी महापुरुष सोबन सिंह जीनाः व्यक्तित्व एवं कृतित्व‘ विषय पर व्याख्यानमाला का आयोजन गणित विभाग के सभागार में हुआ।
इस अवसर पर इस व्याख्यानमाला के  अध्यक्ष रूप में प्रो0 नरेंद्र सिंह भंडारी (माननीय कुलपति सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा), मुख्य अतिथि के रूप में श्री रघुनाथ सिंह चौहान (मा0 विधानसभा उपाध्यक्ष), विशिष्ट अतिथि पद्मश्री डाॅ0 ललित पांडे (निदेशक, सेवा निधि), मुख्य वक्ता के रूप में श्री गोविंद सिंह भंडारी (अध्यक्ष, उत्तराखंड अधिवक्ता महासंघ),परिसर निदेशक प्रो नीरज तिवारी,   गोष्ठी के संयोजक प्रो0 वी0डी0एस0नेगी,  आयोजक सचिव डाॅ0 पारूल सक्सेना ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर और सरस्वती एवं सोबन सिंह जीना जी के चित्र पर पुष्पार्पण कर उद्घाटन किया।
इस अवसर पर योग विभाग की छात्राओं ने सरस्वती वंदना की और स्वागत गीत का गायन किया।
परिसर निदेशक प्रो नीरज तिवारी ने कर्मयोगी महापुरुष  सोबन सिंह जीना जयंती समारोह  के अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि कुलपति जी के सानिध्य में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय कम समय में उत्तरोत्तर विकास कर रहा है।

रूपरेखा प्रस्तुत की

इस अवसर पर जयंती समारोह  के संयोजक प्रो0 वी0डी0एस0नेगी ने कार्यक्रम की विस्तार से रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने जीना जी को स्मरण करते हुए कहा कि जीना जी  को स्मरण करने के लिए प्रतिवर्ष 3 अगस्त को सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय द्वारा मनाए जाने के लिए  प्रस्ताव भेजा जाएगा।  उन्होंने कहा कि सोबन सिंह जीना जी इस उत्तराखंड की पहचान हैं। उनको विश्वविद्यालय द्वारा स्मरण किया जाना हमारे लिए हर्ष का विषय है।

सोबन सिंह जीना जी इस उत्तराखंड की महान विभूति हैं

मुख्य वक्ता श्री गोविंद सिंह भंडारी (अध्यक्ष, उत्तराखंड अधिवक्ता महासंघ) ने संबोधित करते हुए कहा कि सोबन सिंह जीना जी इस उत्तराखंड की महान विभूति हैं। उन्होंने शिक्षा को लेकर स्मरणीय कार्य किया है। इस राज्य के निर्माण में उनकी भूमिका उत्कृष्ट है। जीना जी के संस्मरणों पर प्रकाश डालते कहा कि उनके विपक्षी भी उनसे बौद्धिक विमर्शों के लिए विमर्श करते थे। उनके विरोधी भी उनको मानते थे। उनकी अंतिम यात्रा में लोगों का तांता लगा,क्योंकि जीना जी का व्यक्तित्व इतना विशालता का प्रमाण है। राजनीति से कहीं ऊपर उनका व्यक्तित्व है। उन्होंने सोबन सिंह जीना जी का सम्मान करते हुए गैरसैण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि तभी जीना जी का स्वप्न साकार होगा। विश्वविद्यालय के संबंध में उन्होंने कहा कि कर्मयोगी जीना जी के नाम पर सृजित किया गया है। इसके लिए हमने बहुत अधिक प्रयास किया है।  यह  विश्वविद्यालय विश्व में ख्याति प्राप्त करेगा,ऐसी हमारी आशा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो भंडारी से अनुरोध करते हुए कहा कि जीना जी के कद के अनुरूप इस विश्वविद्यालय को स्थापित करने के लिए कार्य करेंगे। क्योंकि इतिहास प्रथम और वर्तमान कुलपति के कार्यों को ही स्मरण रख पाते हैं।

जीना जी के व्यक्तित्व पर व्याख्यानमाला आयोजित कराना सराहनीय कदम है

विशिष्ट अतिथि पद्मश्री डाॅ0 ललित पांडे (निदेशक, सेवा निधि) ने कहा कि जीना जी के व्यक्तित्व पर व्याख्यानमाला आयोजित कराना सराहनीय कदम है।  यह विश्वविद्यालय परिसर सबसे पुराना है, और इसको बनाने के पीछे किनका योगदान है?को लेकर यहां सूचनापट स्थापित किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा में कौन कौन लोग क्यों समय समय पर यहां आए हैं और उनका योगदान इस अल्मोड़ा के लिए क्या रहा है? इसका उल्लेख किया जाना चाहिए। इस क्षेत्र की पहचान यहां के जनमानस की वजह से है। जबकि यह सिर्फ बाहर से आने वाले लोगों की वजह से पहचाना जा रहा है,इस विषय पर लिखा जाना चाहिए। इसके सही तथ्यों को पहचाना जाना चाहिए।

मुख्य अतिथि के रूप में श्री रघुनाथ सिंह चौहान (मा0 विधानसभा उपाध्यक्ष) ने कहा कि इस परिसर का मैं भी विद्यार्थी हूँ यह मेरा सौभाग्य है

मुख्य अतिथि के रूप में श्री रघुनाथ सिंह चौहान (मा0 विधानसभा उपाध्यक्ष) ने कहा कि मेरा भी सौभाग्य रहा है कि इस परिसर का मैं भी विद्यार्थी रहा हूँ। जीना जी के संबंध में कहा कि  जीना जी के नेतृत्व में 34 सूत्रीय ज्ञापन देने के लिए गए। आंदोलनकारी जेल भी गए। पर्वतीय विकास की अवधारणा को लेकर उनका योगदान आज भी स्मरण किया जाता है।  उन्होंने देश के बड़े नेताओं को पृथक राज्य की स्थापना को लेकर दबाव बनाया था। उत्तरांचल के लिए इस राज्य की जनता ने अपनी शहादत दी है। जीना जी का स्वप्न को अभी भी साकार करने की आवश्यकता है। अल्मोड़ा नगर की पहचान देश में बनी हुई है। हमें जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। अल्मोड़ा का इतिहास काफी प्राचीन है। प्राकृतिक, ऐतिहासिक दृष्टि से यह नगर लोगों को खींचता रहा है।
विश्वविद्यालय को लेकर कहा कि जीना जी के नाम पर बनाया गया यह विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाएगा,ऐसी मेरी कामनाएं हैं। इस विश्वविद्यालय के उन्नयन के लिए धन अवमुक्त शीघ्र किया जाएगा।

4 अगस्त को जीना जी की जयंती के रूप में मनाएंगे

अध्यक्षता प्रो0 नरेंद्र सिंह भंडारी (माननीय कुलपति सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा) ने कहा कि विश्वविद्यालय का चिंतन है कि के कर्मयोगी महापुरुष सोबन सिंह जीना जी के नाम पर इस विश्वविद्यालय  में प्रतिवर्ष 3 अगस्त के दिन करेंगे। प्रतिवर्ष हम आमंत्रित वक्ताओं को विशेष विषय पर चर्चा करेंगे और 4 अगस्त को जीना जी की जयंती के रूप में मनाएंगे। सुनोली गांव को आदर्श बनाने के लिए हम प्रयास करेंगे। हमें अपनी पहचान को बनाये रखने की आवश्यकता है।
हम विश्वविद्यालय के माध्यम से शिक्षा को जीना जी के स्वप्नों के अनुरूप कार्य करेंगे।
हम कैसे इस विश्वविद्यालय को पहच्चान दिलवानी है,इसके लिए हमें प्रयास करने की जरूरत है और हम प्रयास करेंगे। पद्मश्री पांडे जी ने जो हमें एक विषय दिया है, हम उस को आगे बढ़ाएंगे। हम अपनी सांस्कृतिक पहचान को स्थापित करेंगे।
विश्वविद्यालय के उन्नयन के लिए हम हर शिक्षक का सहयोग लेकर इस विश्वविद्यालय की नींव को मजबूत करेंगे। हम परंपरागत विषयों के साथ नए रोजगारपरक विषयों का संचालन कर शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे। आने वाली पीढ़ी के लिए हम कुछ बेहतर करके जाएंगे।
उन्होंने सभी के सहयोग की सराहना की।
सह संयोजिका डॉ. पारुल सक्सेना ने सभी का आभार जताते हुए कहा कि सोबन सिंह जीना जी से संबंधित व्याख्यानमाला कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी का आभार जताया।

व्याख्यानमाला का संचालन डॉ. चंद्रप्रकाश फुलोरिया ने किया।

यह लोग रहे मौजूद

इस अवसर पर  डॉ. देवेंद्र सिंह बिष्ट(विश्वविद्यालय विशेष कार्याधिकारी), परिसर निदेशक प्रो. नीरज तिवारी, प्रो. जगत सिंह बिष्ट (निदेशक,शोध एवं प्रसार निदेशालय), प्रो. इला साह,  प्रो. जया उप्रेती (अधिष्ठाता छात्र कल्याण), प्रो. अनिल कुमार यादव (कुलानुशासक), श्री गोविंद पिलखवाल,प्रो शेखर जोशी, प्रो. जे. एस. बिष्ट,प्रो. विजया रानी ढौडियाल (संकायाध्यक्ष, शिक्षा संकाय), प्रो अमित पंत (संकायाध्यक्ष, विधि), प्रो. एस. ए हामिद, प्रो. के. सी. जोशी (संकायाध्यक्ष, वाणिज्य एवं प्रबंधन), प्रो. निर्मला पंत,प्रो. शालीमा तबस्सुम,  प्रो. भीमा मनराल,( पुस्तकालयाध्यक्ष), प्रो. अनिल जोशी, प्रो जे एस रावत, डॉ तेजपाल सिंह, डॉ. मनोज बिष्ट, श्री ललित प्रसाद, अर्पिता जोशी, डॉ. अनामिका पंत, श्री रवींद्र नाथ पाठक, डॉ सुशील भट्ट, डॉ. संजीव आर्य, डॉ. बलवंत कुमार,प्रो. बी. सी. तिवारी, प्रो एन डी कांडपाल, प्रो. के. एन. पांडे, डॉ. मुकेश सामंत, डॉ. राम चन्द्र मौर्य, डॉ. देवेंद्र धामी,  लियाकत अली खान (विश्वविद्यालय क्रीड़ा प्रभारी), डॉ ललित जोशी (विश्वविद्यालय मीडिया प्रभारी) श्री लल्लन कुमार सिंह, प्रो. सोनू द्विवेदी, प्रो रोबिना अमान, डॉ दयाकृष्ण कांडपाल, डॉ. विजय पांडे, डॉ. चंद्र सिंह चौहान, श्री विभाष मिश्रा,डॉ मनीष त्रिपाठी, डॉ. जे. सी. दुर्गापाल, फोटोचित्रकार जयमित्र सिंह,  डॉ. ललित जलाल, भावना अधिकारी, ललिता तोमक्याल सहित शिक्षक, छात्र-छात्राएं, कंप्यूटर विज्ञान और इतिहास विभाग के शिक्षक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।