पिथौरागढ़/धारचूला: भारत और चीन के बीच उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की धारचूला तहसील में स्थित लिपुलेख दर्रे से सीमा व्यापार शुरू होने जा रहा है। जो छह साल के लंबे अंतराल के बाद अगले सप्ताह से फिर शुरू होने जा रहा है।
लोगों में उत्साह
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विदेश मंत्रालय ने इस व्यापार के लिए ट्रेड पास जारी कर दिए हैं, जिसके बाद केंद्र सरकार के निर्देशों पर उत्तराखंड प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
यह पारंपरिक व्यापार हर साल जून से मध्य अक्टूबर तक संचालित होता है। हालांकि, भारत-चीन सीमांत व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन सिंह रौंकली और महासचिव दौलत सिंह रायपा ने केंद्र व प्रदेश सरकार को मांग पत्र सौंपकर व्यापार की अवधि को 30 नवंबर तक बढ़ाने की मांग की है। इस बार के व्यापार की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि लिपुलेख दर्रे से पहली बार मोटर मार्ग के जरिए सामान का आदान-प्रदान होगा।
समिति ने सरकार के सामने कुछ अन्य प्रमुख मांगें
• गोदाम व दुकानें: तिब्बती मंडी ‘तकलाकोट’ में भारतीय व्यापारियों को पहले की तरह रियायती दरों पर गोदाम और दुकानें उपलब्ध कराई जाएं।
• फंसे माल की निकासी: वर्ष 2020 में व्यापार बंद होने के कारण धारचूला के 44 भारतीय व्यापारियों का करीब 1.25 करोड़ रुपये का माल (गुड़, कॉफी, चीनी, मिश्री आदि) तकलाकोट मंडी के गोदामों में फंसा है, जिसे वापस लाने या बेचने की अनुमति मिले।