रामनगर स्थित कोसी बैराज पुल पर हाल ही में हुए एक दर्दनाक वाहन हादसे के बाद पुल की संरचना को पहुंची गंभीर क्षति ने स्थानीय जनता और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। इस मामले में ‘परामर्श विधि परिवार’ ने गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
प्रमुख शहरों का संपर्क मार्ग खतरे में
हाईकोर्ट अधिवक्ता और परामर्श विधि परिवार के सदस्य पूरन पांडे ने बताया कि कोसी बैराज पुल रामनगर को हल्द्वानी और काशीपुर जैसे महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में व्यापारी, छात्र और पर्यटक इस पुल का उपयोग करते हैं। पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण यातायात बाधित है, जिससे लोगों को लंबा वैकल्पिक मार्ग चुनना पड़ रहा है। इससे समय और ईंधन की भारी बर्बादी हो रही है।
प्रशासन की चुप्पी पर खड़े हुए सवाल
हाईकोर्ट अधिवक्ता मनु अग्रवाल ने इस स्थिति को बेहद संवेदनशील बताते हुए कहा कि पुल की मौजूदा हालत किसी भी समय बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी गंभीर घटना के बाद भी संबंधित विभाग द्वारा अब तक कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया है, जो सीधे तौर पर आम जनमानस की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
परामर्श विधि परिवार की मुख्य मांगें
संस्था ने प्रशासन से जनहित में निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है।
• तत्काल निरीक्षण और मरम्मत: तकनीकी विशेषज्ञों से पुल की जांच कराकर प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कार्य शुरू किया जाए।
• सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: मरम्मत पूरी होने तक पुल पर प्रभावी बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और ट्रैफिक पुलिस की तैनाती सुनिश्चित हो।
• दुर्घटनाओं पर रोक: भविष्य में जनहानि रोकने के लिए पुल के किनारों को और अधिक मजबूत बनाया जाए।
कहीं यह बात
अधिवक्ताओं का कहना है कि यह केवल एक बुनियादी ढांचे का मुद्दा नहीं है, बल्कि हजारों लोगों के जीवन की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो क्षेत्र में सामान्य जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर सकता है।