आज 28 सितंबर 2026 है। आज भगत सिंह की जयंती है। 28 सितंबर 1907 को शहीद-ए-आज़म भगत सिंह का जन्म हुआ था। देश की आजादी में उनके योगदान और बलिदान को याद करने के लिए हर साल यह दिन उनकी जयंती के रूप में मनाया जाता है।
28 सितंबर 1907 को हुआ था जन्म
शहीद-ए-आजम भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पाकिस्तान के पंजाब में स्थित लयालपुर के बांगा गांव के एक सिख परिवार में हुआ था। भगत सिंह को जब फांसी दी गई थी, तो उनकी उम्र महज 23 वर्ष थी। उनकी शहादत के बाद देशवासियों ने आजादी की लड़ाई में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। देश के सबसे बड़े क्रांतिकारी भगत सिंह का जन्म 1907 में 28 सितंबर को हुआ था। 13 अप्रैल 1919 में हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड ने एक पढ़ने लिखने वाले सिख लड़के की सोच को ही बदल दिया और उनका मन अहिंसावादी आंदोलन से उचट गया और उन्होंने ईट का जवाब पत्थर से देने की ठान ली और उन्होंने 1926 में देश की आजादी के लिए नौजवान भारत सभा की स्थापना की। 23 मार्च 1931 की रात भगत सिंह को सुखदेव और राजगुरु के साथ लाहौर षडयंत्र के आरोप में अंग्रेजी सरकार ने फांसी पर लटका दिया था।
शहीद भगत सिंह के क्रांतिकारी विचार
📗📗कठोरता एवं आजाद सोच ये दो क्रांतिकारी होने के गुण है।
📗📗क्रांति में सदैव संघर्ष हो यह जरुरी नहीं| यह बम और पिस्तौल की राह नहीं है।
📗📗सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है।
📗📗राख का हर एक कण, मेरी गर्मी से गतिमान है,मैं एक ऐसा पागल हूं, जो जेल में भी आजाद है।
📗📗जिंदगी तो अपने दम पर ही जी जाती है, दूसरों के कंधों पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं।
📗📗कानून की पवित्रता तभी तक बनी रह सकती है,जब तक वो लोगों की इच्छा की अभिव्यक्ति करे।
📗📗यदि बहरों को सुनना है तो आवाज तेज करनी होगी। जब हमने बम फेंका था तब हमारा इरादा किसी को जान से मारने नहीं था,हमने ब्रिटिश सरकार पर बम फेंका था। ब्रिटिश सरकार को भारत छोड़ना होगा और उसे स्वतंत्र करना होगा।
📗📗व्यक्तियों को कुचल कर, वे विचारों को नही मार सकते।