शारदीय नवरात्रि: नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी को समर्पित, जानें पौराणिक कथा व शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विधान है । मान्यता है कि इस मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों की हर एक मनोकामना पूरी होती है। जो भी जातक देवी कात्यायनी की पूजा पूरी श्रद्धा से करता है, उसे परम पद की प्राप्ति होती है। जो भी भक्त माता कात्यायनी की पूजा श्रृद्धा भक्ति से करता है उसका मन सदैव आज्ञा चक्र में स्थित रहता है। योग साधना में आज्ञा चक्र की महत्वपूर्ण मान्यता है। देवी कात्यायनी असुरों, दानवों तथा पापियों का नाश करने वाली हैं। 

पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक महर्षि कात्यायन थे जिनके कोई पुत्री नहीं थी। एक दिन उन्होंने भगवती जगदम्बा को अपनी पुत्री के रूप में प्राप्त करने की कामना के साथ घोर तपस्या की। उनकी घोर तपस्या से माता जगदम्बा प्रसन्न हुई और उन्होंने महर्षि कात्यायन के यहां माता कात्यायनी के रूप में जन्म लिया तथा मां कात्यायनी के नाम से विख्यात हुई। मां ने महिषासुर नामक दैत्य का वध कर तीनों लोक को उसके अत्याचार से बचाया। महर्षि कात्यायन के यहां पुत्री के रूप में जन्म लेने वाली माता कात्यायनी बेहद गुणवती कन्या थी। उनके जैसी गुणवान, रूपवती तथा ज्ञानवान कन्या पूरे संसार में नहीं थी।

तिथि व मूहर्त

षष्ठी शनिवार 1 अक्टूबर को है। शुक्ल षष्ठी 30 सितंबर को रात 10:34 बजे शुरू होती है और 01 अक्टूबर को रात 08:46 बजे समाप्त होती है। इस दिन का रंग ग्रे है। ग्रे रंग संतुलित भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है।

पूजा की विधि

नवरात्रि के छठे दिन इस दिन प्रातः काल में स्नान आदि से निवृत्त  होकर मां का गंगाजल से आचमन करें। फिर देवी कात्यायनी का ध्यान करते हुए उनके समक्ष धूप दीप प्रज्ज्वलित करें। रोली से मां का तिलक करें अक्षत अर्पित कर पूजन करें। कात्यायनी को ताजे फूल अर्पित करना एक अच्छा शगुन माना जाता है, खासकर कमल। मां को गुड़हल का फूल भी काफी प्रिय है तो आप गुड़हल भी अर्पित कर सकते है। इसके बाद मंत्रों का जाप कर सकते हैं । अंत में मां कात्यायनी की आरती करें ।

इन महामंत्रों का करें जाप

1.या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

2.चंद्र हासोज्जवलकरा शार्दूलवर वाहना|
कात्यायनी शुभंदद्या देवी दानवघातिनि||