21 जनवरी: आज माघ गुप्त नवरात्रि का तीसरा दिन, मां त्रिपुर सुंदरी की पूजा का विधान, जानें महत्व

आज 21 जनवरी 2026 है। आज माघ नवरात्रि का तीसरा दिन है। गुप्त नवरात्रि का आज तीसरा दिन है। तीसरे दिन मां ललिता देवी की उपासना की जाती है। इन्हें मां त्रिपुर सुंदरी के नाम से भी जाना जाता है।

गुप्त नवरात्रि का महत्व

माघ व आषाढ़ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन नौ दिनों में तंत्र साधना करने वाले लोग माँ भगवती के दस महाविद्याओं की पूजा को सिद्ध करने के लिए उपासना करते हैं। इस दौरान प्रतिपदा से लेकर नवमी तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में साधक महाविद्याओं के लिए खास साधना करते हैं। कहा जाता है कि गुप्त नवरात्रि में पूजा और मनोकामना जितनी ज्यादा गोपनीय होंगी, फल उतना ही सुखदायी होगा। मान्यता है कि भक्त  आषाढ़ नवरात्रि में गुप्त रूप से आदि शक्ति देवी दुर्गा की उपासना करते हैं उनके जीवन में कभी कोई संकट नहीं आता है ।

देवी दुर्गा की उपासना और उनकी 10 महाविद्याओं की होती है पूजा

हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 19 जनवरी, सोमवार से हो गई है और वहीं इसका समापन 27 जनवरी को होगा। इन नौ दिन के दौरान मां दुर्गा के 9 अवतारों की आराधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि गोपनीय साधनाओं के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसमें शक्तियों को प्राप्त किया जा सकता है।

जाने पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां वर देने के लिए तत्पर और सौम्य और दया से पूर्ण हृदय वाली मानी जाती हैं। मां की उत्पत्ति को लेकर कई पौराणिक कथाए प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार, भगवान शंकर के हृदय में धारण करने वाली सती नैमिष में लिंगधारिणी नाम से विख्यात हुईं देवी मां को ललिता देवी के नाम से पुकारा जाने लगा। एक अन्य कथा के अनुसार, देवी की उत्पत्ति उस वक्त हुई जब भगवान द्वारा छोड़े गए चक्र से पाताल समाप्त होने लगा। यह स्थिति देखकर ऋषि-मुनि घबरा जाते हैं। पृथ्वी लोक में पानी भरने लगता है। तब सभी ऋषि-मुनि मां ललिता देवी की उपासना करते हैं। उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर मां ललिता देवी प्रकट होती हैं और इस विनाशकारी च्रक को रोक देती हैं। फिर सृष्टि को नवजीवन मिलता है।

सुबह-शाम करें सप्तशती का पाठ

गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों में भी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। ज्योतिष महर्षि पंडित प्रकाश जोशी के अनुसार गुप्त नवरात्रि में नौ दिन के लिए कलश स्थापना की जा सकती है। यदि कलश की स्थापना की है तो सुबह-शाम मंत्र जाप, चालीसा या सप्तशती का पाठ करें। दोनों ही समय आरती करना भी अच्छा होगा। मां को दोनों समय भोग भी लगाएं। माघ गुप्त नवरात्रि में साधकों को नियमों के साथ कुछ विशेष मंत्रों का भी ध्यान रखना चाहिए, जिनका उच्चारण करने से मां भगवती प्रसन्न हो जाती है और भक्तों को सुख एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। ऐसे में साधकों को माघ नवरात्रि का शुभारंभ दुर्गा चालीसा के पाठ से अवश्य करना चाहिए।