उत्तराखंड: भारत के प्रथम गाँव माणा से उठी नशामुक्ति की हुंकार, ‘गंगा से गंगासागर’ तक चलेगा देशव्यापी अभियान, देश के हर कोने तक पहुँचेगा संदेश

विशेष रिपोर्ट: हरेंद्र बिष्ट
थराली/माणा (चमोली): भारत के सीमांत और प्रथम गाँव माणा (बदरीनाथ) से ‘नशामुक्त भारत अभियान’ का भव्य आगाज़ हो गया है। बद्रीनाथ धाम की पावन भूमि पर आयोजित ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव’ के दौरान सामाजिक संस्था ‘सजग इंडिया’ ने इस राष्ट्रव्यापी मुहिम की शुरुआत की। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को नशे के बढ़ते दुष्प्रभावों के प्रति सतर्क करना और देशभर में स्वस्थ व सकारात्मक जीवनशैली का संदेश फैलाना है।

निभाई मुख्य भूमिका

इस अभियान के शुभारंभ अवसर पर सजग इंडिया के प्रतिनिधियों के साथ भारतीय सेना, गढ़वाल स्काउट्स, एनसीसी कैडेट्स और स्थानीय ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सीमांत गाँव से शुरू हुई इस पहल के जरिए देश के कोने-कोने तक ‘गंगा से गंगासागर तक’ और ‘कश्मीर से कन्याकुमारी तक’ नशामुक्ति का संदेश पहुँचाने का संकल्प लिया गया। वहीं देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव के समापन समारोह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थानीय निवासियों, युवाओं और सेना के जवानों से सीधे संवाद किया। उन्होंने समाज को नशामुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों को अनिवार्य बताया। मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे नशे के दंश से दूर रहकर शिक्षा, खेल-कूद और रचनात्मक गतिविधियों में अपनी ऊर्जा लगाएँ।

18 वर्षों से नशामुक्ति की अलख जगा रहे हैं ललित जोशी

सजग इंडिया के अध्यक्ष ललित जोशी पिछले 18 वर्षों से ‘युवा संवाद’ कार्यक्रमों के जरिए नशे के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान चला रहे हैं। वे उत्तराखंड के 1600 से अधिक स्कूल-कॉलेजों में 8 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद स्थापित कर चुके हैं। उनकी इन्हीं निरंतर सेवाओं के लिए भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा उन्हें ‘नशा मुक्त मित्र 2026’ के सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

बताया यह संकल्प

कार्यक्रम के दौरान ललित जोशी ने कहा कि नशे के खिलाफ जंग केवल किसी एक संस्था या सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “माणा से शुरू हुआ यह संदेश जल्द ही देश के हर कोने में पहुँचेगा। युवाओं को नशे से बचाने के लिए उन्हें खेल, रोज़गार और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना बेहद ज़रूरी है।” माणा जैसे सांस्कृतिक व रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान से शुरू हुई इस मुहिम को भविष्य में सेना, एनसीसी और सामाजिक संगठनों के सहयोग से एक बड़े जन-आंदोलन का रूप देने की तैयारी है।