उत्तराखंड: उत्तराखंड में स्थित विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के दान-चढ़ावा प्रकरण की जांच अब केवल एक घटना या कुछ जिम्मेदार व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहेगी। शासन द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच समिति इस पूरे मामले को उत्तराखंड के सभी प्रमुख देवस्थानों की सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था में बड़े सुधार के एक अवसर के रूप में देख रही है।
तैयार होगी एसओपी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक समिति का मुख्य उद्देश्य उन व्यवस्थागत कमियों को दूर करना है, जिनकी वजह से चढ़ावे में गड़बड़ी की आशंका पैदा होती है। जांच समिति के निष्कर्षों के आधार पर अब प्रदेश के सभी प्रमुख मंदिरों में चढ़ावा प्रबंधन, सुरक्षा, निगरानी और दान की गणना के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाएगी। गढ़वाल मंडलायुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति जांच के साथ-साथ सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी तैयार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, समिति का ध्यान सिर्फ बदरीनाथ धाम पर नहीं है, बल्कि वे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासनिक और तकनीकी उपायों का अध्ययन कर रहे हैं।
अन्य मंदिरों का भी होगा निरीक्षण
समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले आवश्यकता पड़ने पर प्रदेश के अन्य प्रमुख मंदिरों का भी दौरा करेगी। वहां दानपात्रों की सुरक्षा, चढ़ावा संग्रह, सीसीटीवी (CCTV) निगरानी, प्रवेश नियंत्रण और जवाबदेही तंत्र का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा। एसओपी में कड़े प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। जिसमें दानपात्रों को लाने-ले जाने की पूरी प्रक्रिया सीलबंद और ट्रैक होने योग्य होगी। चढ़ावे की गणना की पूरी प्रक्रिया की डिजिटल रिकॉर्डिंग और वीडियो कवरेज की जाएगी। सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ कई स्तरों पर अधिकारियों की निगरानी रहेगी। जहां दान की गिनती होगी, वहां बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।गड़बड़ी होने पर अधिकारियों और कर्मचारियों की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।