नैनीताल: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में दशकों से चले आ रहे वरिष्ठता विवाद को समाप्त करते हुए हजारों शिक्षकों के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया है।
हाईकोर्ट का फैसला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 1 अक्टूबर 1990 से पहले तदर्थ (Ad-hoc) आधार पर नियुक्त सभी एलटी ग्रेड शिक्षकों और प्रवक्ताओं की सेवाएं इसी तिथि से नियमित मानी जाएंगी और उनकी वरिष्ठता भी इसी आधार पर तय होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इस मामले से जुड़ी राज्य सरकार सहित सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि यह मुद्दा ‘भुवन कांडपाल प्रकरण’ के तहत पहले ही सुलझाया जा चुका है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगाई है। ऐसे में इस कानूनी विवाद को दोबारा उठाने का कोई औचित्य नहीं है। जिसके बाद अब लंबे समय से वरिष्ठता सूची को लेकर चल रहे विवाद के कारण अटकी पदोन्नति की प्रक्रिया अब तेजी से पूरी हो सकेगी, जिससे बड़ी संख्या में शिक्षक प्रवक्ता के पद पर पदोन्नत हो सकेंगे।
सरकार ने दी यह जानकारी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि नवंबर 2025 में ही संशोधित वरिष्ठता सूचियां जारी कर दी गई हैं। सरकार के अनुसार गढ़वाल मंडल में 268 एलटी ग्रेड शिक्षकों को लाभ दिया गया है। कुमाऊं मंडल में 259 एलटी ग्रेड शिक्षकों को लाभ दिया गया है। प्रवक्ता वर्ग में 418 प्रवक्ताओं को 1 अक्टूबर 1990 से नियमितीकरण और वरिष्ठता का लाभ मिल चुका है।