उत्तराखंड: प्रेरणादायक कहानी: दुचाणू के सुनदास बने मिसाल, सेब उत्पादन के साथ ग्रेडिंग और पैकेजिंग से संवारी किस्मत, खोली अतिरिक्त आय की राह

उत्तरकाशी: सरकारी योजनाओं के सही उपयोग से भी बागवानी के क्षेत्र में तरक्की की नई राहें खुल सकती हैं। जिसकी एक प्रेरणादायक तस्वीर मोरी विकासखंड के दुचाणू गांव से सामने आई है।

योजना का लाभ

जानकारी के अनुसार यहां गांव के निवासी सुनदास ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित योजनाओं का लाभ उठाकर न केवल सेब उत्पादन में अपनी पैठ मजबूत की है, बल्कि ग्रेडिंग और पैकेजिंग के माध्यम से अतिरिक्त आय के नए अवसर भी सृजित किए हैं। सुनदास को एचएमएनईएच (HMNEH) योजना के तहत लगभग 2 लाख रुपये की लागत से एक आधुनिक ग्रेडिंग हॉल उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा, पीएमएफएमई (PMFME) योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपये की लागत से एक ग्रेडेड पैकेजिंग और सॉर्टिंग यूनिट भी स्थापित की गई है। इन दोनों सुविधाओं पर उन्हें 50 प्रतिशत की राज सहायता (सब्सिडी) प्राप्त हुई है।

समय और श्रम की बचत

इस आधुनिक मशीनरी से बागवानी के काम में क्रांतिकारी बदलाव आया है। बागानों से लाए गए सेबों को सॉर्टिंग यूनिट के जरिए गुणवत्ताहीन और क्षतिग्रस्त फलों से अलग किया जाता है। इसके बाद ग्रेडिंग हॉल में सेबों को आकार, रंग और गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।सेबों को सब्सिडी पर मिले प्लास्टिक क्रेट्स और कोरुगेटेड बॉक्स में पैक कर मंडियों तक भेजा जाता है। क्रेट्स से परिवहन और भंडारण आसान होता है, जबकि कोरुगेटेड बॉक्स फलों को नमी व बाहरी चोट से सुरक्षित रखते हैं।

ग्रामीणों को मिला रोजगार

सुनदास की यह यूनिट न केवल उनके खुद के लिए बल्कि क्षेत्र के अन्य बागवानों के लिए भी वरदान साबित हो रही है। आसपास के किसान भी अपनी फसल की ग्रेडिंग व पैकेजिंग के लिए इस यूनिट का लाभ उठा रहे हैं, जिससे सुनदास को 2.5 लाख रुपये से अधिक की अतिरिक्त आय हो रही है। इसके साथ ही, सेब के सीजन के दौरान वे 20 से 25 स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी प्रदान कर रहे हैं।