उत्तराखंड: साहसिक पर्यटन में बड़ी पहल: 100 खतरनाक ट्रैक रूट्स की GPS-GIS मैपिंग शुरू, बिना नेटवर्क के भी रास्ता दिखाएगा स्पेशल ऐप, भेजेगा अलर्ट, देश में ऐसा करने वाला पहला राज्य

​उत्तराखंड: उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन को सुरक्षित और हाईटेक बनाने के लिए धामी सरकार ने एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल शुरू की है।

अलर्ट भी भेजेगा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके तहत राज्य के 100 सबसे दुर्गम और खतरनाक ट्रैकिंग रूट्स की GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) और GIS (भौगोलिक सूचना प्रणाली) मैपिंग का काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए विशेषज्ञों की टीमों को जमीनी सर्वे के लिए रवाना कर दिया गया है। इसके साथ ही उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां इतने बड़े पैमाने पर प्रमुख ट्रैकिंग रूट्स की वैज्ञानिक मैपिंग की जा रही है। यह ऐप बिना मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट के भी काम करेगा और ट्रैकर को सही रास्ता दिखाता रहेगा। साथ ही यदि कोई ट्रैकर भटककर गलत रास्ते पर जाता है, तो ऐप तुरंत ‘अलर्ट’ (Alert) जारी करेगा। किसी भी आपात स्थिति में SDRF और रेस्क्यू टीमें ट्रैकर की सटीक लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए बिना वक्त गंवाए तुरंत मदद पहुंचा सकेंगी।

​अब नहीं भटकेंगे ट्रैकर

​वहीं मैपिंग पूरी होने के बाद उत्तराखंड के ये सभी 100 ट्रैक रूट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व मानचित्र पर दर्ज हो जाएंगे और ट्रैकर्स को एक-एक कदम का सटीक रूट मैप मिल सकेगा। इनमें गढ़वाल और कुमाऊं के 5,700 मीटर से लेकर 7,756 मीटर तक की ऊंचाई वाले प्रमुख ट्रैक शामिल हैं, जिनमें कामेट, नंदा देवी (पूर्वी), चौखंबा, त्रिशूल, शिवलिंग, सतोपंथ, पंचचूली और नीलकंठ जैसी ऊंची चोटियों के रास्ते शामिल हैं।
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