उत्तराखंड में जून की बारिश ने तोड़े पांच साल के रिकॉर्ड, 50 साल बाद जुलाई में बरसे सबसे ज्यादा मेघ, जानें कहां हुई सबसे ज्यादा बारिश

उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई‌ है। उत्तराखंड में लगातार मौसम में बदलाव जारी है। जिसमें जून में इस बार काफी बारिश हुई। जुलाई में भी बारिश का दौर जारी रहा।

बारिश का रिकॉर्ड

जिसके बाद उत्तराखंड में इस बार जून की बारिश ने पांच साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्ष 2018 के बाद इस बार जून में 152.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। जबकि इन पांच सालों में सबसे कम बारिश वर्ष 2019 में 84.3 मिमी हुई थी। इस संबंध में मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के निदेशक विक्रम सिंह ने बताया कि इस बार जून के महीने में काफी अच्छी बारिश हुई है। हालांकि सामान्य तौर पर जितनी बारिश होनी चाहिए उतनी तो नहीं हुई, लेकिन बीते पांच सालों में सबसे ज्यादा 152.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है।

जिसमें इस बार जून में कहां कितनी बारिश हुई। देखें

जिला बारिश (मिमी में)

नैनीताल 92.3

अल्मोड़ा 76.7

बागेश्वर 245.7

यूएस नगर 141.9

देहरादून 246.3

चमोली 142.9

पिथौरागढ़ 157.8

हरिद्वार 233.1

चम्पावत 110.8

जुलाई में भी जमकर बरसे मेघ

वहीं कुमाऊं के नैनीताल, पिथौरागढ़ व चंपावत जिलों में दीर्घ अवधि के औसत से कम वर्षा हुई है।‌ गढ़वाल में केवल पौड़ी का नाम सामान्य से कम वर्षा वाले जिलों में शामिल है। जुलाई में वर्षा के जोर पकड़ने के बाद भी नैनीताल का नाम सबसे कम वर्षा वाले जिलों में सबसे ऊपर है। पिथौरागढ़ दूसरे व चंपावत तीसरे स्थान पर हैं। पौड़ी चौथे नंबर पर है। दून में इस जुलाई में बीते 50 वर्षों में सर्वाधिक वर्षा हुई। इस दौरान देहरादून में 845 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो कि सामान्य (534 मिमी) के सापेक्ष 58 प्रतिशत अधिक है। इससे पहले वर्ष 1973 में हुई 1257 मिमी वर्षा आल टाइम रिकॉर्ड है। वहीं प्रदेश में औसत वर्षा सामान्य से 32 प्रतिशत अधिक रही, जिसमें बागेश्वर में सर्वाधिक और अल्मोड़ा में सबसे कम वर्षा रिकॉर्ड की गई। मानसून सीजन में एक जून से 31 जुलाई तक सामान्य से 19 प्रतिशत अधिक वर्षा हो चुकी है, जबकि अगस्त में प्रदेशभर में वर्षा सामान्य रहने के आसार हैं।

एक जून से होती है मानसून सीजन की शुरुआत

मानसून अवधि की शुरुआत एक जून से होती है। एक जून से 19 जुलाई तक उत्तराखंड में 424 मिमी के सापेक्ष 434 मिमी वर्षा हुई है। सामान्य से यह 26 प्रतिशत अधिक है। अधिक बरसने के बाद भी कुमाऊं के तीन जिलों में वर्षा का आंकड़ा सामान्य तक भी नहीं पहुंच पाया है। नैनीताल में सामान्य से 32, पिथौरागढ़ में 26 व चंपावत जिले में 17 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। पौड़ी में मात्र चार प्रतिशत कम पानी बरसा है। दूसरी ओर सर्वाधिक वर्षा हरिद्वार जिले में हुई है। हरिद्वार में सामान्य से तीन गुना अधिक वर्षा हुई है। दूसरे स्थान वाले बागेश्वर में दोगुना से ज्यादा पानी बरसा है।