उत्तराखंड: उत्तराखंड के ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को भांपते हुए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
करेंगे यह अध्ययन
इसी क्रम में संवेदनशील ग्लेशियर झीलों के अध्ययन और सटीक वैज्ञानिक जानकारी जुटाने के लिए वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों के एक संयुक्त दल को रवाना किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते मंगलवार को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) कार्यालय से सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने इस दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। विशेषज्ञों का यह दल दो अति-संवेदनशील झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन करेगा।
• सरस्वती ताल (चमोली): समुद्र तल से लगभग 5,700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित।
• केदार ताल (उत्तरकाशी): समुद्र तल से लगभग 4,750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित।
• टीम इन झीलों में ‘बैथीमेट्री सर्वे’ के जरिए पानी की कुल मात्रा, गहराई, फैलाव और तलहटी की बनावट का नक्शा तैयार करेगी। इससे यह आकलन करने में मदद मिलेगी कि ग्लेशियर टूटने या बादल फटने की स्थिति में झील के किनारे कितना दबाव सह सकते हैं।
इस संयुक्त दल में शामिल
• USDMA और ULMMC
• वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान
• बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (लखनऊ)
• राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (रुड़की)
• नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM)
• NDRF और SDRF की टीमें
• टीम में रोहित कुमार, डॉ. विशाल, डॉ. शेख नवाज अली, शुभजीत घोष, डॉ. पिंकी बिष्ट सहित कई भूविज्ञानी और पर्वतारोही शामिल हैं।