उत्तराखंड: सरकारी डॉक्टरों के लिए सख्त नियम: दुर्गम में नौकरी छोड़ना अब होगा मुश्किल, NMA/NMC के सख्त नियम लागू

​उत्तराखंड: उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में नौकरी पाने के बाद दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती से कतराने वाले एमबीबीएस डॉक्टरों पर सरकार अब शिकंजा कसने जा रही है।

बदलाव के निर्देश

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग में चयन के बावजूद नौकरी ज्वाइन न करने या बीच में छोड़ने वाले डॉक्टरों को अब भविष्य में दोबारा भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का मौका नहीं मिलेगा। इसके लिए सरकार जल्द ही डॉक्टरों की भर्ती नियमावली में संशोधन करने जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए अधिकारियों को नियमावली में बदलाव करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

NMC का सख्त नियम

सरकारी और निजी दोनों तरह के डॉक्टरों के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने एक नया और सख्त नियम जारी किया है। एनएमसी के इन दिशा-निर्देशों के तहत सोशल मीडिया पर पेड रिव्यू या इन्फ्लुएंसर के जरिए डॉक्टरों का प्रचार करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। एनएमसी के निर्देश मिलने के बाद उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल ने प्रदेश में रजिस्टर्ड 15 हजार से अधिक डॉक्टरों को इन नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. सुधीर पांडेय ने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने पर पहले चेतावनी दी जाएगी, दूसरी बार पकड़े जाने पर लाइसेंस 3 महीने के लिए निलंबित किया जाएगा, और यदि इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टर का पंजीकरण हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाएगा।