उत्तराखंड: UKSSSC की ओर से पुलिस कांस्टेबल से संबंधित यह लिस्ट जारी, एक क्लिक में पढ़िए

उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के विज्ञापन संख्या 65/उ०००च०आ०/2024 दिनांक-30 अक्टूबर, 2024 में उत्तराखण्ड पुलिस विभाग के अन्तर्गत आरक्षी जनपदीय पुलिस (पुरुष) के 1600 रिक्त पदो तथा आरक्षी पौएसी/आईआरबी (पुरुष) को 400 रिका मदों का विज्ञापन जारी किया गया।

दी यह जानकारी

उक्त पदों की शारीरिक माप जोख एवं दक्षता परीक्षा दिनांक 24 फरवरी, 2025 से 04 अप्रैल 2025 तक एवं शारीरिक परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की लिखित प्रतियोगी परीक्षा दिनांक-63 अगस्त, 2025 को प्रातः 11:00 बजे से अपराह्न 01:00 बजे तक आयोजित की गयी। वहीं शारीरिक एवं लिखित प्रतियोगी परीक्षा के संयुका प्राप्तांकों के आधार पर अभिलेख सन्निरीक्षा की औपबंधिक श्रेष्ठता सूची दिनांक 29 दिसंबर, 2025 को आयोग की वैबसाइट पर प्रकाशित करते हुए दिनांक 12 जनवरी 2026 से 18 फरवरी, 2028 तक श्रेष्ठता सूची में सम्मिलित अभ्यर्थियों की आधीग कार्यालय में अभिलेख सन्तिपरीक्षा एवं पदों की वरीयता प्राप्त की गई।

देखें वेबसाइट

अभिलेख सन्निरीक्षा के उपरांत श्रेष्ठताक्रम एवं अभ्यर्थियों द्वारा दी गयी वरीयता के आधार पर आई अभ्यर्थियों की संस्तुति संबंधित विभाग को प्रेषित किये जाने एवं अभ्यर्थियों के सुलभ संदर्भ हेतु चयन संस्तुति की औपबंधिक श्रेष्ठता सूची दिनांक 27 फरवरी, 2026 को आयोग की वेबसाइट पर प्रकाशित की गई। अवगत है कि उपरोक्त क्रम में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के चिन्हित आंदोलनकारी या उनके आश्रित के लिए आरक्षित पदों के सापेक्ष लिखित एवं शारीरिक दक्षता परीक्षा तथा अभिलेख तन्निरक्षा के आधार पर आ पाये गये अभ्यर्थियों की चयन संस्तुति की औपबंधिक श्रेष्ठता सूची आयोग की वेबसाइट www.sasc.uk.gov.in पर अवलोकनार्थ प्रकाशित की जा रही है। साथ ही अवगत कराया है कि उपरोक्त पदों हेतु की जाने वाली नियुक्तियां उच्च यायालय उतराखण्ड में योजित याचिका संख्या-16/26- लक्की पवार व अन्य याचिकाओं ने दिनांक 08. जनवरी, 2026 को न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में न्यायालय के अंतिम आदेश के अधीन तथा उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के विनिहत आंदोलनकारी या उनके आश्रित हेतु प्रदत आरक्षण मा० उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड नैनीताल में योजित रिट संख्या– 152/24 भुवन सिंह व अन्य बनाम उत्तराखण्ड राज्य व अन्य में मा० न्यायालय के अंतिम आदेश के अधीन रहेगी।